Thursday, November 17, 2016

दिलों का मोल

तलाशा बहुत

पर इस टूटे दिल का ख़रीदार मिला ना कोई

बिखरें आँसओं की चुभन से

भयभीत था हर कोई

हर एक पारखी नज़र वाला जोहरी था

दिलों के इस बाज़ार में

टूटे दिलों का इसलिए कोई मोल ना था

सपनों के इस बाज़ार में

फिर कोशिश की जोड़ लू इसे

फ़िर कोई एक खाब्ब से

पर मिला ना इसको भी कोई हमसफ़र

क्योंकि सब तलाश रहे थे दिलों को

अरमानों की बरसात में

अरमानों की बरसात में

Monday, November 14, 2016

मझधार

अहसास बिछड़न का जब हुआ

मायने प्यार के बदल गए

अधूरी कहानी वफ़ा की तलाश में

दिल के चौबारे में सिमट गयी

संगदिल से संजीदा हो ए मासूम

महरूम अपने आप से हो गया

मन बहलाने की शौकियां में

तसब्बुर बदल डाला उसने इस मासूम का

इश्क़ ए गुनाह भी वो कर उनके नाम

खुद इस मझधार से रुखसत हो गए

चेतना शून्य



बिछड़न का गम ऐसा था 

तन्हाई के सिवा कोई ओर पास ना था 

यादें भी सब बेवफ़ा निकली 

टूटे अरमानों से नाता उन्होंने भी तोड़ लिया 

शून्य हो गया आलम दिल का 

लील गया मंजर बिछोह उसका 

रह गया  चेतना शून्य आलम अपना 

चला गया कोई चुरा दिल इसका  

 

कब्र

बेवफ़ाई उनकी दिल को रास नहीं आयी 

बन माट्टी के पुतले

बिन जनाज़े ही जिंदगी

कब्र ए सुपर्दे ख़ाक हो आयी

कशीदें क्या पढ़ूँ टूटे दिल की शान में

आलम तन्हाई का ऐसा था

दिल की इस मज़ार पे

कोई फ़रयादी भी ना था




Tuesday, November 1, 2016

काँची

ए जिंदगी बिन धड़कन तूने जीना सीख लिया

दर्द को ही तूने धड़कन बना लिया

रूबरू ए जिंदगी तू जब काँची दिल से हुई

खो धड़कनों को जिन्दा लाश तू बन गयी

और उन बिलखती साँसों को

सजा ए ऐतबार

मौत से भी महरूम कर गयी

मौत से भी महरूम कर गयी