Monday, August 29, 2016

अजनबी कशिश

उस रूह के हम गुलाम हो गए

दिल जिससे कभी रूबरू हुआ नहीं 

कुछ ऐसी वो अजनबी कशिश थी

खाब्बों में जिसकी धुँधली सी तस्वीर थी

रंग कैसे भरता इस मौशिकी की ताबीर में

क्योँकि  मिली ना वो परछाई थी

गुलामी जिसकी सर चढ़ आयी थी

मंजर सपनों का ए बड़ा प्यारा था

दिल की फिजाओं को महकता जिसका आलम था

दीदार मगर उस रूह के अब तलक हुए नहीं

फिर ख्यालों में भी दिल 

कभी किसी ओर रूह को बेकरार हुआ नहीं

बेकरार हुआ नहीं



Saturday, August 27, 2016

जिंदगी की तलाश

चल एक बार फिर से जिंदगी की तलाश करे

तेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ तलाश करे

दुओं की कमी ना रह जाए कही

आ मिल फिर खुदा से फरियाद करे

नजर ना लग जाए शहर की कही

दामन को तेरे गैरों से बचते बचाते चले

आ कुछ ऐसे पलों की तलाश करे

मैं और तुम से आगे निकल

हम में खुशियों की तलाश करे

चल फिर से एक बार जिंदगी की तलाश करे

एक बार फिर से जिंदगी तलाश करे

Saturday, August 13, 2016

जज्बातों की बात

सब जज्बातों की बात है

कही प्रेम तो कही कपटी चाल है 

उड़ाता मख़ौल बचपन की वो बात है 

वक़्त के साथ बदल गयी जज्बातों की बारात है 

ना अब वो चाँद महफिले शान है 

ना ही ग़ज़लों में वो रूमानी अंदाज़ है 

बस कुछ पल का याराना 

फ़िर अँधेरी रात है

सब जज्बातों की बात है

बदल गयी अब वक़्त की रफ़्तार है

खुशफ़हमी के आलम में जीने को

मजबूर आज हालात है

सब जज्बातों की बात है

Sunday, August 7, 2016

बारिस

भोर की बारिस कान में कुछ गुनगुना गयी

हौले से नींद मेरी चुरा ले गयी

मिज़ाज कुछ ऐसा आशिक़ाना बना गयी

बाँहों में उनके दीदार करा गयी

सर्द ठंडी आहों में

तड़पते दिल को बेकरार बना गयी

बदनाम थे आशिक़ हम

बारिस उसपर क़यामत बरसा गयी

हर करवटों में

सपनों की एक नयी सौगात थमा गयी

भर रूह को बदरी के आगोश में

छम छमा छम मेघ बरसा गयी

भोर की बारिस चुपके से

निंदिया चुरा ले गयी