Friday, January 22, 2016

किश्तों में जिंदगी

किश्तों में जिंदगी जीना हमने छोड़ दी

लकीरें हाथों की हमनें मोड़ दी

देख जज्बे को

ख़फ़ा रहने वाली क़िस्मत भी खिलखिला उठी

फ़ैसला मुक़दर का अपने था

धारा जिंदगी की हमने मोड़ दी

वंचित रह न जाए जिंदगानी कही

फ़िज़ों में खुशबू हमने बिखेर दी

झुक गया आसमां भी

जिन्दा रहने की क़वायद जब हमने सीख ली

किश्तों में जिंदगी जीना हमने छोड़ दी

लकीरें हाथों की हमनें मोड़ दी

किश्तों में जिंदगी जीना हमने छोड़ दी






राह

चला था अकेला जिस नयी राह पर

मुसाफ़िर तो यूँ अनेक मिले उस राह पर

हमसफ़र कोई मिला नहीं मगर उस राह पर

गुजरती घड़ियाँ जैसे सादिया बन गयी

वक़्त जैसे ठहर गया उस राह पर आके

भूलभुलैया थी पगडंडियों की उस राह के आगे

कदम रुक गए उस राह पे आके

दिशाहीन हो भटक गया उस राह के आगे

नामों निशां ना था मंजिल का उस राह के आगे

कशमकश की इस राह पे आके

अब तो यह भी भूल गया जाना किस राह के आगे

अब तो यह भी भूल गया जाना किस राह के आगे 


सुर्खियाँ

सुर्खियाँ बटोरीं थी हमने

बदनामी के ताल में

साजिश रची थी उस गुमनाम ने

मोहब्बत के जाल में

सुध बुध खो बह गया था

प्यार की धार में

सपनें बड़े ही हसीन थे

पर छोड़ चले गए थे

किसी ओर के साथ में

छोड़ बेहाल हमें अपने हाल पे

थाम लिया था बेवफ़ा ने दामन

किसी ओर के साथ में

किसी ओर के साथ में

Thursday, January 21, 2016

अधूरी कहानी

हर जिंदगानी की एक अधूरी कहानी है

कुछ कही कुछ अनकही  सी कहानी है

कोई दिल के करीब तो कोई दिल से दूर

क्षिलमिलाते तारों सी कहानी है

बेक़रार हर दिल अज़ीज़ फिर भी  है

मिलने किसी नए मोड पर

कहानी जो रुखसत हुई थी

छोड़ बंदगी किसी अनजाने मोड़ पर

भर ना पाये रंग अब कशिश के कभी

प्यासी लफ्जों सी दिल की ए कहानी है

कहानी अधूरी भले ही वह सही

साया उस बानगी को मगर साथ आज भी है

हर जिंदगानी की एक अधूरी कहानी है

कुछ कही कुछ अनकही  सी कहानी है

हर जिंदगानी की एक अधूरी कहानी है

हर जिंदगानी की एक अधूरी कहानी है