Thursday, July 30, 2015

परिवर्तन

परिवर्तन हैं प्रकृति का रूप

हर रात के बाद हैं

सुबह की धूप

बदलते मौसम के संग

अँगारे बन जाते हैं फूल

ना ही कोई अमर हैं

ना हैं कोई सास्वत

कुदरत का यही हैं उसूल

पन्नों में जिंदगी

जिंदगी में काँटो की सूल

प्रकृति का यही है स्वरूप

परिवर्तन हैं प्रकृति का रूप

परिवर्तन हैं प्रकृति का रूप

Friday, July 24, 2015

नयी चेतना

आवेग हूँ मैं ऐसी

बाँध सके ना जिसे कोय

मझधार से मेरी जो मिले

जुदा ना फ़िर मुझ से होय

जुदा ना फ़िर मुझ से होय

उफ़ान हूँ चरम पे

प्रपात में लिए घनघोर शोर

प्रपात में लिए घनघोर शोर

फ़िर भी

शीतल निर्मल प्रवाह हूँ मैं

स्पर्श आलिंगन से मेरी

नयी चेतना की अनुभूति होय

नयी चेतना की अनुभूति होय 

एक नई कहानी

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं

दर्द में डूबी दास्ताँ को

आंसुओं का आसरा देता हैं

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं

लहूलुहान जिंदगानी के ताने बाने में

फिर से जिन्दगी तलाश करता है

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं

नफ़रत की इस पटककथा में भी

प्यार के बीज पिरतों हैं

दिल जब कभी उदास होता हैं

एक नई कहानी वयां करता हैं



Friday, July 17, 2015

अधरों पे

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

जलती है जब शमा

परवाना मचल जाता है

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

झुक जाती है नजरें

नूर तेरा जब नजर आता है

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

थम जाती है साँसे

हिजाब तेरा जब सरक जाता है

अधरों पे नाम तेरा

आते आते रुक जाता है

मोड़

वो मोड़ कुछ ओर था

ये मोड़ कुछ ओर है

तू खाब्बों की ताबीर थी

मैं गुनाहों की तस्वीर था

फ़ासलों के इस दरमियाँ भी

डोर कोई अनजानी बँधी थी

पर इस मुक़ाम को

मंजिल की कहा सौगात थी

तस्वीर के इस पहलू  को

रंगों से जैसे कोई नाराजगी थी

मानों खफा हो दिल की वादियाँ

अधूरी साँसों में

धड़कने टटोल रही थी

साक्षी थी जो वफ़ा की

बानगी उसकी तलाश रही थी

पर उजड़ चुका था घरौंदा

मगर दिल को ये खबर तक ना थी

मगर दिल को ये खबर तक ना थी