Wednesday, February 12, 2014

हृदय परिवर्तन

हृदय परिवर्तन कि

तू भी अभिलाशा रख हे मानव

जब एक प्रहार में

पत्थर बदल अपना स्वरुप

लग मंदिर में खुदा कहला सकता है

जड़ अँगूठी में हीरा कहला सकता है

फिर क्यों नहीं तुम बदल सकते

अपना ये घिघौना स्वरुप

उतार दो मुखौटे को

धारण करलो कुदरत का सच्चा स्वरुप

धारण करलो कुदरत का सच्चा स्वरुप

Sunday, February 9, 2014

भवँर

उजाले में रोशनी कि कवायद थी

पर यहाँ उजाले में भी

अंधरे कि सुगबुगाहट थी

वो मर्मस्पर्शी चेतना मानो

चेतना शून्य हो भटक रही थी

मुश्किल इस डगर कि राह मानो

चमत्कारिक उजियारे कि बाट जोह रही थी

अहंकार के अंधियारे में

जैसे रोशनी कि कोई बिसात ना थी

प्रकाश कि किरणें भी जैसे

सहमी सहमी नजर आ रही थी

भवँर था यह ऐसा

खुदगर्जी के आगे राह नजर आ नहीं रही थी

उजाले से रोशनी कि कवायद थी

पर यहाँ उजाले में भी

अंधरे कि सुगबुगाहट थी

Saturday, February 8, 2014

प्यार का पैग़ाम

पैग़ाम प्यार भरे सपनों का था

साथ मगर उसमें तेरे गीतों का था

हर लफ्जों में जैसे तेरा अक्स था

पैग़ाम ए जैसे तेरे दीदार का आईना था

छिटक रहा था नूर जैसे तेरा कोई

बेताब हो चाँदनी चाँद से मिलने जैसे कही

लगने लगा जैसे

पैग़ाम के बदले खुदा मिल गया हो कोई


खामोशियाँ

खामोशियों को आवाज़ दो

गूँजेगी वो दिल के हर ओर

टकरा के पूछेगी दिल से

गुमशुम खामोश क्यों हो तुम

जन्नत यही है मेरे यार

जहाँ खड़े हो तुम बन मेरे सरताज

फिर किस उलझन में

यूँ खामोश उदास हो मेरे यार

हर जबाब है इन खामोशियों के पास

तलाशते फिर रहे हो फिर क्यों कही ओर

पुकारोगे जो दिल से

चहक चहक बोल उठेगी खामोशियाँ हर ओर

Saturday, February 1, 2014

आधे अधूरे से खाब्ब

नींद न जाने कहाँ खो गयी

जिंदगी सपनों कि दुनिया से बेजार हो गयी

खाब्ब अब आधे अधूरे से रह गए

नज़ारे सारे

नयनों के सामने सिमट गए

रोग ए कैसा लगा

बोझिल पलकें भी

जैसे करवटों में बदल गयी

ओर सुहानी रात कि घड़ियाँ

तारें गिनते हुए गुजर गयी

तारें गिनते हुए गुजर गयी

जज्बा

अफसानों कि महफ़िल सजी है

कुछ मीठे कुछ खट्टे लहमे

चहरे कि मुस्कान बन

आँखों के आंसू बन

थामे यादों के गुलदस्ते

फिर से एक बार चले आये है

छटा महफ़िल कि जैसे निखर आयी है

बुझ ना जाए कही

महफ़िल कि यह हसीन समां

कर आँखे बंद दिल में छुपा लू

प्यारा से ए सुन्दर जज्बा