Saturday, September 13, 2014

अनुभूति

अनुभूति तेरे प्यार की

आस एक जगा गयी

खलिस थी जो मन में

वो मिटा गयी

सपने के घरोंदे को

हक़ीक़त बना गयी

जो थी अब तलक

सिर्फ ख्यालों में

वो धड़कन बन

दिल में समा गयी

अनुभूति तेरे प्यार की

शमा जीने की जला गयी

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