Monday, December 2, 2013

साँसों कि साज

हम उन राहों में जिंदगी छोड़ आये

जहाँ कभी दिल कि शमा रोशन हुआ करती थी

चमन कि आगोश में शाम ढला करती थी

साक्षी थी वो हसीन चाँदनी रात

करवट ले ली थी किस्मत ने

जब कुदरत के हाथ

सुन के भी दिल कि रुंदन पुकार

धड़कने लौटा ना पायी

रूठी साँसों कि साज

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