Sunday, October 6, 2013

प्यार के नगमे

तेरे प्यार के नगमों पे मैं इतराऊ

बन पवन का झोंका

तेरे संग संग लहराऊ

तू ही है जन्नत मेरी

मैं तेरी आँखों में बस जाऊ

तेरे गीतों पे दीवानों सा इतराऊ

साज बन तरानों सा बहता जाऊ

मैं तेरी सरगम में घुल मिल जाऊ

दिल में तेरे मैं बस जाऊ

तेरे प्यार के नगमों पे मैं इतराऊ   

3 comments:

  1. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार ८ /१०/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है ।

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    1. महोदया
      प्रोत्साहन के लिए आभारी

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  2. कल 17/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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