Sunday, December 23, 2012

मिले कैसे

मिले तुमसे कैसे

तुमने कभी पुकारा नहीं

चाहे तो चाहे तुम्हे कैसे

तुमने कभी चाहा नहीं

बिन तेरे जिये कैसे

जीना तुझे गंवारा नहीं

तुम जो बदल गए

हमें भी वो गंवारा नहीं

जिक्र किया तुमने जमाने का

अफसाना ये परवान चढ़ा नहीं

कैसे कहे तुमसे

इस बेदर्द जमाने को

प्यार की क़द्र है नहीं

मिले जो तुमसे तो

इजहार करे इश्क तुमसे

पर मिले कैसे

मिलना तुम्हे गंवारा नहीं

 

2 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 25/12/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है ।

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