Sunday, November 25, 2012

तांडव

बबंडर ऐसा उठेगा

कोहरा घना छा जाएगा

गुब्बार जो दफन होगा

ज्वालामुखी सा फुट जाएगा

गुमान भी ना होगा

वक़्त ऐसा भी आएगा

दिन में रात का अँधेरा घिर आएगा

खत्म हो जाएगा पल में सब कुछ

तांडव ऐसा आएगा

तांडव ऐसा आएगा







 

2 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 27/11/12 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका चर्चा मंच पर स्वागत है!

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