Wednesday, October 3, 2012

दीवानगी की जंग

लुट ली जमाने ने अस्मत मोहब्बत की

रुसवा हो गयी परछाई मोहब्बत की

सिमट गया दायरा

दब गयी मोहब्बत सीने में कहीं

बेआबरू वो कैसे हो

जुड़ी हो जिससे दिलों की धड़कन

सिसकियाँ भर फरमाया दिल

मोहब्बत है सबसे हसीन चीज

बाँध सर पे कफ़न

ओढ़ी जब प्यार की चादर

बदनाम कैसे फिर प्यार हो

जमाने को यह अहसास हो

दीवानगी की ये जंग

प्यार करनेवाले सरफारोसो के नाम हो !!

 

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