Monday, July 9, 2012

किताब

किताब जिन्दगी की रंगीन थी

पर वो किताब अधूरी थी

कुछ पृष्ट रिक्त थे

चाह कर भी जिनमे रंग ना भर पाया

मुस्कराहट के पीछे छिपे आंसुओ को

शब्दों में वयां ना कर पाया

किताब के ह़र पन्ने को भर ना पाया

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