Sunday, June 19, 2011

नया भारत

आओ एक नया भारत गढ़े

नफरत की बेड़ियों में जकड़ी

दास्ता से इसे मुक्त करे

ज़हा ना भाषा को हो भेद

ना भाषा आधारित हो राज्य

ऐसी सुन्दर कल्पना साकार करे

सबको मिले समान अधिकार

स्वतंत्र हो सब प्रगट करने अपने विचार

जाति धर्म अमीरी गरीबी को भुला

खुद को हिन्दुस्तानी कहलाने में गर्व हो

ऐसे परिवेश की सृष्टि करे

आओ मिल बदल दे वक़्त की रफ़्तार

जन क्रांति से रच दे नया इतिहास

लोकतंत्र से जनतंत्र तक

पैगाम ए ह़र जनमानस तक पहुचा दे

स्वतंत्रता है हमारा जन्म सिद्ध अधिकार

आओ नये भारत की कल्पना को साकार बना दे

हकीक़त में अपना भारत महान बना दे

Tuesday, June 14, 2011

कलम की ताकत

कथा है दो वीर योद्धाओं की

जंग लड़ी जिन्होंने सुरवीरों सी

सुन अवाम की आवाज़

विद्रोह कर दिया दोनों ने

प्रशासन के खिलाफ

कूद पड़े जंग ऐ मैदान

एक ने थामी थी तलवार

तो दूजे ने कलम को बना लिया अपना हथियार

पहले योद्धा का लड़ते लड़ते

रण भूमि हो गया बलिदान

कुचल दिया प्रशासन ने

हिंसा से भरा क्रांति मार्ग

पर दूजे ने कलम से बदल दिया इतिहास

जाग गयी चेतना

पढ़ क्रांतिवीर के सुन्दर विचार

उमड़ गया सड़कों पर जनता का सैलाब

अपने घुटने नतमस्तक हो गयी सरकार

देख रक्तविहीन क्रांति का आगाज

जीत गयी कलम हार गयी तलवार

कलम का दम

परिवर्तन कभी रुकता नहीं

मिल जाये कलम का सहारा

क्रांति फिर कभी असफल होती नहीं

पर आसानी से मिलती नहीं आज़ादी राह भी

मिलती है सफलता हार के बाद ही

अगर कलम में हो दम

क्रांति को फिर कोई दबा सकता नहीं

सपना

तुम हो एक सुन्दर सपना

रचा बसा हुआ है जिसमे मन मेरा

खिलते हुए गुलाब सा तेरा हसीन चेहरा

आ कर अटक गया उस पे दिल मेरा

जैसे आज तुम बन गयी मेरा सपना

वैसे में कब बनूगा तेरा सपना

बतलाना मुझको ए हसीना

Friday, June 10, 2011

क्रांति

लहर उठी परिवर्तन की

बदल गयी कायनात सारी

हो गया साम्राज्य छिन्न भिन्न

पड़ गयी अवाम की आवाज़ भरी

जन क्रांति ने ऐसी राह दिखला दी

सोई मानव चेतना जगा दी

बदले परिवेश

आन्दोलन की भेंट चढ़ गयी तानाशाही

सफल हो गया सत्याग्रह

परिवर्तन ने ऐसी लहर चला दी

Sunday, June 5, 2011

पस्त होसलें

त्यज दिया धैर्य

देख दुर्गम मार्ग

पस्त हो गए होसलें

मंजिल ना थी इतनी आसान

बीच राह छोड़ दिया प्रयास

इसे नियत मान

वो डरपोक कायर था नादान

झुक गया घुटनों के बल

कर अपनी हार स्वीकार

Friday, June 3, 2011

जीवन खुशबू

जन्म से होती है जिन्दगी की आगाज

उत्तार चढ़ाव से भरा होता है जीवन काल

मौत बना लेती है जीवन को ग्रास

पर कहती है नियति

आत्मा में रहती है

जीवन खुशबू विधमान

महकती रहती है जो

इंतकाल के भी बाद

तेरा सुरूर

कल जब मैं मधुशाला में था

तेरा जिक्र चला था

सुनके तेरे चर्चे

मदहोशी का आलम छा गया था

बिन जाम को लबों से लगाए

तेरा सुरूर छा गया था

Thursday, June 2, 2011

बुरा

हां मैं बुरा हु

पर उतना भी नहीं

जितना लोग कहते है

दर्द का अहसास मुझे भी है

पर जमाने ने किये

इतने जुल्मो सितम

की चाह कर भी दिखावे को

अच्छा बन नहीं सकता

अब तो बस आदत सी हो गयी है

ऐ जिन्दगी की कहानी सी बन गयी है

जाने अनजाने

जाने अनजाने तुने ऐसा कुछ कह दिया

राहें अपनी जुदा है

ऐ हमे बतला दिया

पर नाता दिलों का टूट सकता नहीं

नाम रिश्तों के बदल सकते नहीं

इसलिए तेरी खुशियों की खातिर

खुशी खुशी अलविदा हमने कह दिया

वरदहस्त

सर पे प्यार से किसीने रखा जो हाथ

गुमनाम अनजान को

वरदहस्त मिली छत्र छाया

इस परोपकार ने बदल दिया

उस अनजान का जीवन सारा