Friday, December 30, 2011

हमारी दोस्ती

नज़र लग गयी दोस्ती को हमारी

दो दिन में बिखर गयी यारी हमारी

रुसवा ऐसी हुई यारी

दिल आंसुओ के संग छोड़ गयी यारी

डर लग रहा अब करने में यारी

कहीं किसी छोटी सी तकरार पे

रूठ धोखा ना दे जाये ऐ यारी

नज़र लग गयी दोस्ती को हमारी

नया साल

इस रात के संग साल गुजर जायेगा

आनेवाली सुबह के संग नये साल का सबेरा आयेगा

कुछ खट्टी कुछ मिट्ठी यादों से भरा

यह वर्ष पल में विदा कह जायेगा

आशा करे आनेवाला नया वर्ष

नया जोश नयी उमंग लेकर आयेगा

जीत हार

तुम से जीत के भी

हारने को मन करता

तुम से हार

दिल को सकून मिलता है

ऐ कैसा बंधन है

जिसमे जिन्दगी हार जाने को मन करता है

तुम से जीत के भी

हारने को मन करता है

Thursday, December 29, 2011

शर्मिंदा

उम्र पूछ शर्मिंदा ना करो यार

बस इतना तुम जानलो यार

लड्क्क्पन अभी गुजरा नहीं यार

जवानी अभी हमसे रुसवा हुई नहीं यार

उम्र पूछ शर्मिंदा ना करो यार

तुम बिन

तुम बिन अधूरी मेरी कविता

साज बिन सुर अधूरा

तुम बिन ह्रदय अधूरा

बिन संगीत गीत अधूरा

तुम बिन अधूरी मेरी कविता

Wednesday, December 28, 2011

जिया

वो गुजरे कल की बात करूँ

या आने वाले पल की बात करूँ

छोड़ो चलो आज की बात करूँ

हर पल नयी उमंग लिए जीवन आत्मसात करूँ

रह ना जाये कोई ख्वाइश अधूरी

इसलिए इस पल में जिया करूँ

हजारों साल

सुन्दर सौम्य सहज

बिटिया तुम हो सबसे सरल

जिस दिन से महकी तेरी जिंदगानी

मिल गयी खुशियाँ ढेर सारी

नज़र ना लगे किसीकी

संग तेरे ऐसे ही मुस्काये कायनात सारी

सालगिरह की इस बेला

मंगल कामना यही है हमारी

हर अभिलाषा पूर्ण हो तुम्हारी

हजारों साल जीये बिटिया हमारी

Tuesday, December 27, 2011

लाली

कोहरे की चादर में लिपटी

सुबह की लाली

मुस्का रही कलियाँ

खिल रही लाली

बरस रहा नूर

छा रही शबनम की लाली

सिमट रही जिन्दगी

देख ठिठुरन की लाली

कोहरे की चादर में

लिपट रही सुबह की लाली

युवा शक्ति

भ्रमित हो रही युवा शक्ति

चन्द लोगो को कठपुतली बन

नाच रही युवा शक्ति

मकसद आवाहन को भांप नहीं रही युवा शक्ति

चक्रव्यू में फंस रही युवा शक्ति

भ्रमित हो रही युवा शक्ति

एक गलत संदेश से

धूमिल हो रही देश की हस्ती

कहीं संग देश के खत्म ना हो जाये युवा शक्ति

स्वर

स्वर जो मुखर होगा

ऐसा जलजला आयेगा

रोक ना पाये जिसे कोई

ज्वालामुखी सा ऐसा तांडव फूटेगा

तबाह हो जायेगी कायनात सारी

एक छोटी सी चिंगारी से जब

जन मानस जल उठेगा

Tuesday, December 20, 2011

जाम

मधुशाला जाते है हम तो

जाम छलकाने को

साकी रूठ ना जाये कहीं

इसलिए लबों से लगाने को

भुला सारी दुनिया

आगोश में इसकी समाने को

भटकती रूह को

इसकी मदहोशी में डुबाने को

मधुशाला जाते है हम तो

जाम छलकाने को

दोस्ती

जो पल तेरे संग गुजारे

वो सबसे हसीन बन गए

खोया जिन्दगी ने बहुत कुछ

कहीं तुमको भी खो ना दे

दुआ करो

हमारी दोस्ती को किसीकी नज़र ना लगे

वक़्त के संग ए ओर परवान चढ़े

आघात

टूटती है जब आस

बंद नज़र आते है ह़र द्वार

चीत्कार उठती है सिसकियाँ

देख ह्रदय आघात

खत्म हो जाती है जिन्दगी

अँधेरे गर्भ में समाय

टूटती है जब आस

दिल को दे जाती है आघात

Friday, December 9, 2011

अभिशाप

जिन्दगी खोक से निकलने को छटपटाती

दर्द के संग जीवन में कदम ले आती है

नाता दर्द से जो जोड़ा

आखरी साँसों तक उसका साथ निभाती है

शायद इसिलये जिन्दगी वरदान भी

अभिशाप कहलाती है

जिन्दगी का दर्द

जिन्दगी इतना दर्द क्यों देती है

ह़र दिन के बाद रात क्यों होती है

गम हल्का करे कैसे

आंसुओं से भी अब

मुलाक़ात हुआ नहीं करती है

कहे तो कहे किससे

साँसे भी दिल का साथ नहीं देती है

जिन्दगी इतना दर्द क्यों देती है

एक बार

एक बार जो कह देती दिल की बात

फूल बिछा देता कदमों में

रोशन सितारों से राहें बना देता

थाम लेती एक पल को भी जो तू मेरा हाथ

मांग में तेरी सिंदूर सजा देता

चाँद को तेरा गुलाम बना देता

पहली मुलाक़ात

वो पहली मुलाक़ात

जैसे पहली बारिस का अहसास

था आँखों को किसीका इन्तजार

जैसे सावन को बारिस की आस

जिया धड़क रहा था बार बार

देख सनम को आस पास

जैसे कह रहा हो चाँद

बिन चांदनी मेरा क्या है अहसास

छोटी गुडिया

ठुमक ठुमक चलती जाए

तितली सी उडती जाए

फूलों सी खिलती जाए

कभी हँसती जाए

कभी हँसाती जाए

दिल हर्षित करती जाए

ठुमक ठुमक चलती जाए

प्यारी सी छोटी सी ये गुडिया


नन्ही जान

नन्ही सी तू जान

परियों की तू सरताज

देख तेरी हरकतें

दिल मन ही मन मुस्काय

तुतली जुबाँ से पुकारे जब तू

ह्रदय पुलकित तब हो जाए

Wednesday, December 7, 2011

उम्र

जोर चलता अगर उम्र पर

थाम लेता बचपन यहीं पर

सपनों की उस सुन्दर दुनिया में

ख्वाइश पूरी कर लेता जीने की

रंग देता जीवन के उन हसीन पलों को

बचपन की उम्र अगर फिर पास होती

काश थाम लेता बचपन यहीं पर

मन का डर

मन ए कहता है

दिल ए डरता है

टूट जाता है दिल

पास आके कोई

दूर जब हो जाता है

मन ए कहता है

दिल ए रोता है

इश्क में जब डूब जाता है

चैन दिल का लुट जाता है

मन ए कहता है

लगन जब लगती है

दिल ए जलता है

पाने को मचलता है

इसलिए दिल ए डरता है

मन ए कहता है

विचार

असमंजस में घिरी विचारों की ध्वनि

मंथन किया शब्दार्थ का

बड़ गयी बैचनी भारी

अंतर भावार्थ से बदल गयी मौलिक अभिवैक्ती

उलझन भरे द्वन्द में तब कोंधी

रौशनी बन एक युक्ति

कठिन समय संयम करनी होगी

भावनाओ की स्थिथि

छट जायेंगे असमंजस के बादल

खुल जायेगी विचारों की गुंथी

मिल जायेगा हल

ओर पहेली के भंवर से निकल आएगी

विचारों की कस्ती

छलावा

जिन्दगी एक छलावा है

इस पल सबेरा उस पल अँधियारा है

यह तो बस एक हसीन सपना है

जो मौत के संग बिखर जाना है

जीन ले जो इन पलों को खुशियों से

मरके भी वो जिन्दा रहते है लोगो के दिलों में

Thursday, December 1, 2011

ढाई आखर

पा लिया जिसने ढाई आखर का ज्ञान

कर लिया उसने अमृत्व रस पान

बहे माधुर्य कंठ से

प्रेम सुधा बन वरदान

प्यार और बोलों के आलिंगन से

खुल जाये दिल के द्वार

बजे कर्णों में एक ही धुन बारम्बार

जान लिया जिसने ढाई आखर का आधार

ही गया उसका मुरीद सारा संसार

अकेला चाँद

लाखों तारों में चाँद अकेला

चांदनी की उसकी आगे

शर्माए तारों का मेला

जगमग करते तारों के बीच

चमके जैसे माथे की बिंदिया

बदले रूप देख तारों की बेला

नज़र ना लगे किसीकी

लगा लिया काजल का टीका

चाँद अकेला पर बात निराली

इसके आगे तारों की टोली हारी

फिर भी लाखों तारों में चाँद अकेला

किस राह

किस राह चलना है

मुझको बतलाना तुम

सबक अच्छा मिले

उस राह का पता बतलाना तुम

पर बीच राह हाथ छुड़ा कर जाना न तुम

किस राह चलना है

मुझको बतलाना तुम

नयनों की भाषा

सदियाँ लग गयी जीन लफ्जों को कहने में

आँखों ने पल वो कह डाली

छुआ जब दिल को प्यार ने

अश्रु धरा बह आयी

इन्तजार खत्म हुआ

नयनों को नयनों की भाषा समझ आयी

दूजी बेला

प्यार जो पनपा

शादी के बंधन में महका

सुन्दर फूल खिले दो ऐसे

प्यार का आंगना खुशियों से छलका

उड़ गया वक़्त पंख लगा के

आ गयी स्वर्ण बेला

वर्ण किया फिर एक दूजे को

शुरू हो गयी प्यार की दूजी बेला

Wednesday, November 9, 2011

प्यार के नगमे

दिल से निकले सुरों को

मिल जाती है जब जुबान

धड़कने तब बन जाती है साज

संगीत की इस मधुर राग से

फिर बरसने लगती है

प्यार भरे नगमों की बरसात

Monday, November 7, 2011

सपनों के घरोंदे

गुजर गए वो लहमे वो पल

जिनमें हम मुस्कराए करते थे

अब तो बस यादों के सहारे

जिन्दगी गुजारा करते है

यादों के इन हसीन पलों को

जिन्दा रखने के लिए

सपनों के घरोंदे बनाया करते है

बड़े खाब्ब

छोटे से दिल के बड़े बड़े खाब्ब

झिलमिल करते तारों के संग

मचलते मासूम दिल के अरमान

रंग बी रंगी सपनों की दुनिया

दिखलाती बड़े बड़े खाब्ब

कहता है दिल , पूरे करने है अरमान

छोटे से दिल के बड़े बड़े खाब्ब

Saturday, November 5, 2011

अरमान

तम्मनाये अभी बाकी है

हसरतें अभी आधी है

चलती रहे साँसे जब तलक

तब तलक धडकनों की आस बाकि है

जूनून है ये वो

प्यास जिसकी अभी बाकी है

मिट्ठी सी कशीश है ये

साँसे जिसके लिए अब तलक बाकि है

यारों इस मासूम दिल के अरमान अभी बाकि है



Wednesday, November 2, 2011

तरस

बेवजह इतना भी आंसुओ पे

सितम ढाया ना करो

खुशी या गम के पलों

जो इनको तरस जाया करो

डर

कुछ कहने से दिल ये डरता है

पर बिन धड़कन ये धडकता है

प्यार मिले या ना मिले

पर ठंडी आहें भरता है

चाहत ऐसी

बिन साँसे भी ये मचलता है

Saturday, October 29, 2011

बैगर

सेतु ऐसा बना

लफ्ज जो ना कह सके

आँखों ने कह दिया

रिश्ता कुछ ऐसा परवान चढ़ा

प्यार के बैगर

सारा जग बेकार लगा

मझधार

हदों को टूटने ना दो

साहिलों को डूबने ना दो

मिलेगा किनारा

मझधार में नैया डूबने ना दो

प्रयास

खुदा नहीं मैं

कोशिश फिर भी करूँगा

हसरतें हो जाये पूरी

प्रयास ये मैं करूँगा

Tuesday, October 25, 2011

दिवाली

दीपों की लड़ी

फूलों की माल

व्यंजनों की बाहर

पटाखों की फुहार

जगमग हुए दिल

रोशन हुई रात

ले आयी दिवाली खुशियों की सौगात

Saturday, October 15, 2011

इजहार

मैं तुम बन जाऊ

तुम मैं बन जाओ

मैं चाँद बन जाऊ

तुम चांदनी बन जाओ

मिलन इस घड़ी

प्यार का इजहार कर जाओ

जब दिल रोया

खफा तुम क्यों हो

मैं जान ना पाया

कोशिश की मगर तुमको हसां ना पाया

तेरी मासूमियत पे प्यार आया

रो पड़ा दिल

पर तेरे चेहरे पे मुस्कान बिखेर ना पाया

Friday, October 14, 2011

अंगीकार

गल हार बन जाऊ

माथे की बिंदिया बन जाऊ

सिंदूर बन मांग में सज जाऊ

करले तू अंगीकार

धड़कन बन दिल में बस जाऊ

काजल बन जाऊ

आँखे बन जाऊ

लहू बन नस नस में समा जाऊ

करले तू अंगीकार

प्यार बन साँसों में घुल जाऊ

Wednesday, October 12, 2011

हमारी याद

जलता रहा विरह अग्नि में

पूरी हुई ना मिलन की आस

लुट गया चैन ओ अमन

पर आयी नहीं उनको हमारी याद

बिखर गया सपना

टूट गयी साँसों की रफ़्तार

जलता रहा विरह अग्नि में

पर आयी नहीं उनको हमारी याद

नया पल

प्रतिक्षण एक नया पल

कुदरत लेती एक नया जन्म

सृष्टि संरचना बदलती पल प्रतिपल

समय के गर्भ समाये जीवन के पल

पल पल ह़र पल

प्रतिपल प्रतिक्षण एक नया पल

Wednesday, September 28, 2011

मैं

वसुंधरा का गुल हु मैं

महके चमन जिससे

धरा का वो फूल हु मैं

पवन की वेग हु मैं

खिले चमन जिससे

रौशनी का वो आफताब हु मैं

ओस की शबनम हु मैं

लहलहाए चमन जिससे

बारिस की वो बूंद हु मैं

जीवन का अहसास हु मैं

गूंजे चमन जिससे

धड़कन की वो जान हु मैं

Monday, September 26, 2011

वेदना

खामोश लफ्ज सहमी आँखे

वेदना जो अभिव्यक्त करती है

मन मस्तिष्क को झिझोर जाती है

आघात दिल को ऐसा दे जाती है

जड़ चेतना शून्य हो जाती है

ओर ग़मों के दायरे में जीवन भर के लिए

दर्द का दामन थामा जाती है

Friday, September 23, 2011

अनमोल माँ

बंटवारा हुआ जब घर का

कहा एक रिश्तेदार ने

भाई को मिली अपार धन दौलत

तुमको मिली सिर्फ आस

कहा मैंने , सुनो ए रिश्तेदार

सबसे अनमोल '' माँ '' मिली है मुझको , नादान

तुम क्या समझोगे

इसके आगे सारी दौलत है बेकार

खामोश आँखे

खामोश आँखे ढूंड रही साँसे

साज मिले सुर से

कह रही साँसे

टूटे दिल को मिले प्यार भरी राहें

कह रही साँसे

बेकरार दिल तलाश रहा बाहें

खामोश आँखे ढूंड रही साँसे

मासूम मन

मासूम मन तब बहला था

चुपके से तुने जब दिल को छुआ था

लगन वो ऐसी लगी थी

बिन कहे ह़र बात कह गयी थी

प्यार भरी वो मीठी खुमारी

ठंडी आहेँ छोड़ गयी थी

मासूम मन तब बहला था

चुपके से तुने जब दिल को छुआ था

मासूम मन तब बहला था

Monday, September 19, 2011

आधार

खाब्ब संजोये थे नयनों ने जो

शब्दों में वयां उन्हें कर पता नहीं

काश स्वरुप के उसको

कोई आकर मैं दे पाता

हकीक़त में जीने का

आधार उसे बना पाता

खाब्ब संजोये थे नयनों ने जो

पूरा उन्हें मैं कर पाता

आशाये

सूर्य नतमस्तक को

झुक गया हिमालय

उसकी आभा किरणों से

सज गए शिवालय

गूंज उठी अजान स्वर लहरी

प्रभात बेला फिर चली आयी

संग अपने नयी आशाये ले आयी

वाबरा मन

मन वाबरा ओ मन वाबरा

खोजे फिरे पिया का आंगना

मन वाबरा ओ मन वाबरा

पिया रंग मन ऐसा रंगा

अब पिया बिन जिया लागे ना

मन वाबरा ओ मन वाबरा

गाये गीत प्यार का

आजा ओ पिया ओ पिया

तुझ बिन अब जिया जाये ना

मन वाबरा ओ मन वाबरा

बचपन की याद

बचपन की वो याद

चल देते थे बाज़ार

पकड़ पिता का हाथ

तलाशती रह जाती माँ

लग जाती आँख मिचोली

भाई बहनों के साथ

ना कोई फिक्र थी

ना थी कोई चिंता

सपनों की तरह बीत गया बचपन

अब तो बस शेष रह गयी
यादें ही यादें


सवाल

जिन्दगी कई बार कई सवाल करती है

जबाब मगर ह़र बार अधूरे मिलते है

क्योंकि दिल सच्चाई को स्वीकार करता नहीं

ओर मष्तिष्क दिल की बात अनसुनी करता नहीं

Sunday, September 11, 2011

मौन आँखे

अक्सर दिल कुछ कहता है

गुमशुम मौन आँखे

चुपचाप सुनती है

आंसुओ में लिपटी आँखे

छलछला आने को तरसती है

डरती है मगर सोच के

भावनाओ के सैलाब में

कही जिन्दगी बह ना जाये

ओर दर्द के साये में

सहमी सहमी सी जिन्दगी गुजरती रहती है

Monday, September 5, 2011

बेताब

आज दिल तुमसे बातें करने को बेताब है

अफ़सोस मगर तू सितारों के पास है

ख्वाईस फिर अधूरी है

मगर यादें अब भी दिल के पास है

दूर हो तो क्या

इन आँखों को अब तलक बस तेरी ही चाह है

Friday, September 2, 2011

शायद

तपस्या करते करते

आधी जिन्दगी गुजर गयी

मुराद पर पूरी ना हुई

कमी ना जाने कौन सी रह गयी

तम्मना कुछ ओर अब ना रही

तक़दीर शायद यही थी

सोच जिन्दगी मौन हो गयी

बौना

पहली ही मुलाक़ात में

खोल दिये सारे राज

मुमताज अपनी प्रेम कहानी के आगे

बौना दिखेगा ताज

पैगाम है प्यार के नाम

जमाने ने कब समझा

लैला मजनू का बलिदान

तुम जो करलो हमारा प्रस्ताव स्वीकार

तोहफे में ला देंगे तुम्हे पूरा चाँद

कुछ भी कहे अब दुनिया

सितारों के बीच होगा अपना मुकाम

सबसे जुदा , पर अनोखा होगा अपना प्यार

यादों के संग

तेरी यादों ने बुझे दीये फिर से जला दीये

उदासी में गुम दिल को फिर खिला दीये

बेकरार मैं आज भी संग तेरे जीने को

पर गुम हो गयी तुम कही

छोड़ हमें यादों के संग जीने को

इम्तिहान

धैर्य धर धीरज रख

इम्तिहान की ऐ घड़ी भी गुजर जायेगी

जीत ली जो संयम की बाज़ी

इस रात की सुबह फिर आएगी

बुलंद रख हौसले को

हार भी जीत में बदल जायेगी

अंतर्ध्यान

पल में सब कुछ भूल गया

आवारा पागल हो गया

हसरतें गुजरे कल की बात हो गयी

कलम जो साथ थी

वो भी साथ छोड़ गयी

अब तो याद ही ना रहा

शब्दों की प्रेरणा कब अंतर्ध्यान हो गयी

Sunday, August 21, 2011

आन्दोलन

रिश्वतखोरी के खिलाफ आन्दोलन ऐसा छा गया

ह़र हिन्दुस्तानी सड़को पे आ गया

देख इस जन आक्रोश

असमंजस में घिर गयी सरकार

सोचा ना था भ्रष्टाचारके खिलाफ

कभी ऐसा भी उमड़ेगा जन सैलाब

मूकदर्शक बन गयी निक्कमी सरकार

सुनी नहीं इसने वक़्त की आवाज़

छिड़ गया जो रण अब भ्रष्टाचार के खिलाफ

कमर कसह़र हिन्दुस्तानी हो गया त्यार

अपने लहू से लिखने एक नया इतिहास

दिलाने देश को उसको खोया सन्मान

जागो लोगो ए है वक़्त की पुकार

जय भारत जय हिंदुस्तान

Wednesday, August 10, 2011

खफा

जिन्दगी मैं तुझसे खफा नहीं

पर देने के लिए मेरे पास

दुआओं के सिवा कुछ ओर नहीं

ह़र पल तुने नये रंग दिखलाए

जो सच ना हो सके

उन खाब्बों के संसार बनाये

ख़ुशी कभी मिली नहीं

ओर आंसुओं ने साथ कभी छोड़ा नहीं

फिर भी ए जिन्दगी मैं तुझसे खफा नहीं

संदेशा

बादलों में संदेशा है

हवाओं ने रुख मेरा घेरा है

वर्षा में रंग मेरा है

बूंदों में तन तेरा है

भींगे तुम जो सजन

मधुर मिलन ए अपना है

बादलों में संदेशा है

Saturday, July 23, 2011

पिता की याद

भींगी पलके नाम आँखे

याद दिला रही आपकी बातें

छोड़ इस रोज साथ हमारा

इस जग को आप त्याग गए

पर सच्चे मार्ग दर्शन को

सुनहरी यादों की सौगात दे गए

अनूठा प्यार

अनूठा है प्यार अपना

फासला है इतना

मिलन कभी हो सकता नहीं

पर एक दूजे बिन रह सकते नहीं

तुम चाँद बन गयी

मैं धरा बन गया

एक दूजे को बस निहार सके

अपने प्यार की ऐसी नियति बन गयी

सावधान

सावधान होशियार

हवालदार खबरदार

जाग रहा है पहरेदार

आँख मिचोली खेल रहा

चोरों का है सरदार

सतर्क निगाहों ने पकड़ ली

चोर की ह़र चाल

जरा सी चुक से

चोर बेचारा पहुँच गया हवालात

सवधान होशियार

Friday, July 22, 2011

कशमकश

ना इनकार ना इकरार

कशमकश में उलझी सांस

ह्रदय कहे

प्रगट करे कैसे इस दीवाने दिल के विचार

सिर्फ दो लफ्जों की है बात

कांपते है लव

पर कहने में दिल की बात

क्या पता उनको अच्छी ना लगे

जज्बातों भरी पात

कशमकश में उलझी है सांस

अंतिम साँसे

चिर शैया पर लेटी

अंतिम साँसे गिन रही जिन्दगी

गुजर गया ह़र वो पल वो लहमा

ललक थी जिसमे जीने की

अब तो सपना बन रह गयी जिन्दगी

बस कुछ पल की मेहमा रह गयी जिन्दगी

अनंत निंद्रा में विचरण

व्याकुल हो गयी जिन्दगी

झलक जीवन की दूर हो गयी जिन्दगी

पलकें सदा के लिए मूंद ली जिन्दगी

कर सफ़र जीवन का खत्म

विदा हो गयी जिन्दगी

विदा हो गयी जिन्दगी

प्यार की बात

कितनी मधुर दिलकश होती है

प्यार की बात

आती है जब जुबां पे

छेड़ जाती है दिल के तार

चहक उठती है सपनों की दुनिया

सुन उमंग प्यार की बात

खाब्बों सी हसीन दिलकश होती है

दिल की आवाज़

मिली होती है इसमें

जज्बातों की मिठास

कशीश होती है प्यार की

बहती है जो सपनों के साथ

इतनी मधुर दिलकश होती है

प्यार की बात

निंद्रामग्न

ठहराव है विखराव है

समुद्र की लहरे भी लाजबाब है

ना वो वेग है

ना वो तरंग है

धारा जैसे मौन है

खामोश समुद्र जैसे निंद्रामग्न है

Sunday, June 19, 2011

नया भारत

आओ एक नया भारत गढ़े

नफरत की बेड़ियों में जकड़ी

दास्ता से इसे मुक्त करे

ज़हा ना भाषा को हो भेद

ना भाषा आधारित हो राज्य

ऐसी सुन्दर कल्पना साकार करे

सबको मिले समान अधिकार

स्वतंत्र हो सब प्रगट करने अपने विचार

जाति धर्म अमीरी गरीबी को भुला

खुद को हिन्दुस्तानी कहलाने में गर्व हो

ऐसे परिवेश की सृष्टि करे

आओ मिल बदल दे वक़्त की रफ़्तार

जन क्रांति से रच दे नया इतिहास

लोकतंत्र से जनतंत्र तक

पैगाम ए ह़र जनमानस तक पहुचा दे

स्वतंत्रता है हमारा जन्म सिद्ध अधिकार

आओ नये भारत की कल्पना को साकार बना दे

हकीक़त में अपना भारत महान बना दे

Tuesday, June 14, 2011

कलम की ताकत

कथा है दो वीर योद्धाओं की

जंग लड़ी जिन्होंने सुरवीरों सी

सुन अवाम की आवाज़

विद्रोह कर दिया दोनों ने

प्रशासन के खिलाफ

कूद पड़े जंग ऐ मैदान

एक ने थामी थी तलवार

तो दूजे ने कलम को बना लिया अपना हथियार

पहले योद्धा का लड़ते लड़ते

रण भूमि हो गया बलिदान

कुचल दिया प्रशासन ने

हिंसा से भरा क्रांति मार्ग

पर दूजे ने कलम से बदल दिया इतिहास

जाग गयी चेतना

पढ़ क्रांतिवीर के सुन्दर विचार

उमड़ गया सड़कों पर जनता का सैलाब

अपने घुटने नतमस्तक हो गयी सरकार

देख रक्तविहीन क्रांति का आगाज

जीत गयी कलम हार गयी तलवार

कलम का दम

परिवर्तन कभी रुकता नहीं

मिल जाये कलम का सहारा

क्रांति फिर कभी असफल होती नहीं

पर आसानी से मिलती नहीं आज़ादी राह भी

मिलती है सफलता हार के बाद ही

अगर कलम में हो दम

क्रांति को फिर कोई दबा सकता नहीं

सपना

तुम हो एक सुन्दर सपना

रचा बसा हुआ है जिसमे मन मेरा

खिलते हुए गुलाब सा तेरा हसीन चेहरा

आ कर अटक गया उस पे दिल मेरा

जैसे आज तुम बन गयी मेरा सपना

वैसे में कब बनूगा तेरा सपना

बतलाना मुझको ए हसीना

Friday, June 10, 2011

क्रांति

लहर उठी परिवर्तन की

बदल गयी कायनात सारी

हो गया साम्राज्य छिन्न भिन्न

पड़ गयी अवाम की आवाज़ भरी

जन क्रांति ने ऐसी राह दिखला दी

सोई मानव चेतना जगा दी

बदले परिवेश

आन्दोलन की भेंट चढ़ गयी तानाशाही

सफल हो गया सत्याग्रह

परिवर्तन ने ऐसी लहर चला दी

Sunday, June 5, 2011

पस्त होसलें

त्यज दिया धैर्य

देख दुर्गम मार्ग

पस्त हो गए होसलें

मंजिल ना थी इतनी आसान

बीच राह छोड़ दिया प्रयास

इसे नियत मान

वो डरपोक कायर था नादान

झुक गया घुटनों के बल

कर अपनी हार स्वीकार

Friday, June 3, 2011

जीवन खुशबू

जन्म से होती है जिन्दगी की आगाज

उत्तार चढ़ाव से भरा होता है जीवन काल

मौत बना लेती है जीवन को ग्रास

पर कहती है नियति

आत्मा में रहती है

जीवन खुशबू विधमान

महकती रहती है जो

इंतकाल के भी बाद

तेरा सुरूर

कल जब मैं मधुशाला में था

तेरा जिक्र चला था

सुनके तेरे चर्चे

मदहोशी का आलम छा गया था

बिन जाम को लबों से लगाए

तेरा सुरूर छा गया था

Thursday, June 2, 2011

बुरा

हां मैं बुरा हु

पर उतना भी नहीं

जितना लोग कहते है

दर्द का अहसास मुझे भी है

पर जमाने ने किये

इतने जुल्मो सितम

की चाह कर भी दिखावे को

अच्छा बन नहीं सकता

अब तो बस आदत सी हो गयी है

ऐ जिन्दगी की कहानी सी बन गयी है

जाने अनजाने

जाने अनजाने तुने ऐसा कुछ कह दिया

राहें अपनी जुदा है

ऐ हमे बतला दिया

पर नाता दिलों का टूट सकता नहीं

नाम रिश्तों के बदल सकते नहीं

इसलिए तेरी खुशियों की खातिर

खुशी खुशी अलविदा हमने कह दिया

वरदहस्त

सर पे प्यार से किसीने रखा जो हाथ

गुमनाम अनजान को

वरदहस्त मिली छत्र छाया

इस परोपकार ने बदल दिया

उस अनजान का जीवन सारा

Saturday, May 21, 2011

वाणी

ओजस्व वाणी बहे जिनके मुखारबिंद से


बन श्रृंगार रस की मुधर धारा


उनके ह्रदय कण कण विराजे


प्रेम अनुराग की धारा


स्वयं सरस्वती विराजे


इन मधुर कंठ की छाया


बहे फिर कैसे नहीं


मीठे रस से भरी


प्रेम रस की भाषा

डर

अंतरमन की व्यथा कहने से डरता हु


गैरों के उपहास से


क्रोधाग्नि में जलने से डरता हु


हां मैं स्वीकार करता हु


मैं डरता हु


आत्मसमान की खातिर


आत्मग्लानी में जलने से डरता हु


जिन्दा रहने की लिए


मरने से डरता हु


हां मैं डरता हु

दोष

पुलिंदा शिकायतों का


गफलत ही गफलत


कसर ही कसर


ध्यान केन्द्रित नहीं


भूल अपनी स्वीकारे नहीं


औरो के सर


दोष मडने से चुके नहीं


लापरवाह बेरुखी से


किसी कार्य का निष्पादन नहीं

अधूरी हसरतें

जुदा हो गयी फिर राहें


अधूरी रह गयी


फिर सब हसरतें


सितम वक़्त ने


फिर ऐसा किया


मिलाके बिछड़ने को


फिर से मिला दिया


सुलगते अरमानों को


फिर से बुझा दिया


ह़र लहमों को फिर से


अनजाना बना दिया

Tuesday, May 10, 2011

नया प्रयास

ज्ञान चक्षु खोल

जिज्ञासा के है बोल

अभिलाषाए होगी अनंत

उद्भव उथान को

नया प्रयास रहेगा सतत

जोर

छलकते नयनों का पैमाना नहीं होता

बहते आंसुओ का ठिकाना नहीं होता

ख़ुशी हो या गम के

आंसुओ पे जोर किसीका नहीं होता

लक्ष्य

लक्ष्य एक स्वरुप अनेक

सुनहरे भविष्य को सिरमौर करने

बड़ चले कदम

अंकुरित हो नयी फसल

खिल उठे सुन्दर कपोल

करने कल्पना को साकार

बड़ गए कदम

कह रही जिन्दगी

कर्म ही पाठशाला

पा लक्ष्य को

खुशियों से

छलक गए नयन

ओर बह रही अश्रुधारा में

मिल बह गया कष्ट सारा

चिंगारी

लील ली एक चिंगारी ने

जिंदगानी सारी

धूं धूं कर सुलग उठी

कायनात सारी

प्रबल प्रचंड अग्नि लपट

पल में भस्म हो गयी

धरोहर सारी

तपिश

तपिश जो मेरी रूहों से निकली

मन को तेरे

प्रेम अगन में

झुलसा गयी

जल गया तन भी

जब तुने साँसों से साँसे मिला दी

Saturday, April 23, 2011

बेटिया

बेटिया तो अहसास होती है

माँ बाप के पास

कुछ पल की मेह्मा होती है

बेटिया तो बस अहसास होती है

छोटे से इस अंतराल में

रंगों से भरी खान होती है

बेटिया तो बस अहसास होती है

चहचाहट से जिसकी गूंजे आँगन

सपनों सी वो शहजादी होती है

बेटिया तो बस अहसास होती

माँ की ममता पिता की आन होती है

जिस घर जन्मे

उस घर की शान होती है

बेटिया तो बस अहसास होती है

रुला बाबुल को

एक दिन

प्रियतम की डोर थाम लेती है

बेटिया तो बस एक अहसास होती है

पर जिन्दगी में

वो सबसे खास होती है

बेटिया तो बस अहसास होती है

साज नया

मैंने साज नया गाना है

गीत प्यार भरे गुनगुना है

तेरी नस नस में

सरगम बन बस जाना है

तेरी धडकनों को

अपने प्यार भरे संगीत से सजाना है

मैंने साज नया गाना है

हवा का झोंका

मैं हवा का वो झोंका हु

जो कही ठहरता नहीं

बांधे कोई डोर

मुझे रख सकती नहीं

रंग है मेरे अनेक

दामन मेरा कोई

थामेरख सकता नहीं

तेरी याद

नींद अब मुझको आती नहीं

याद तेरी दिल से जाती नहीं

ना जाने मुझको क्या हो गया

तुझसे आगे दुनिया नज़र आती नहीं

Friday, April 22, 2011

कृष्ण नाम संग

अगन लगी श्याम संग

मगन हो गयी मीरा

मोहन नाम संग

छोड़ महलों को

थाम ली कृष्ण मुरारी की डगर

विषपान कर गयी

कर अपने गोपाल को स्मरण

अमर हो गयी मीरा

कृष्ण नाम संग

साँसों के साथ

जानेमन दिल तुने चुरा लिया

हमको नींद से जगा दिया

ह़र पल अब बाँहों को है

तेरा ही इन्तजार

मेरी साँसे अटकी है

तेरी साँसों के साथ

आधार

जब की हमने अपने रिश्तों की बात

कहा उन्होंने

गोल गोल करो ना बात

कहा हमने

गोल गोल कुछ भी नहीं

मेरा तो है बस यही

मीठे बोलो का अंदाज

बुरा अगर लगा हो तो

माफ़ करना मेरे यार

ओर अब तुम ही बतलाओ

क्या होना चाहिए

अपने रिश्ते का आधार

गहरे राज

ह़र शब्दों में छुपे है

गहरे राज

बुझ सको तो जानू यार

की तुम हो मेरा प्यार

वर्ना करना ना

तुम मेरा इन्तजार

तेरी महक

दिल अब लगता नहीं तेरे बिना

निगाहें कुछ ओर देखती नहीं

तेरे सिवा

ह़र आहट में तलाशे

तेरी ही खनक

ह़र फूलों में तलाशे

तेरी ही महक

ख़त की चासनी

यूँ लगे ख़त की चासनी में

मिठास कम रह गयी

भेजे मेरे पैगाम का जबाब

इसीलिए अब तलक आया नहीं

कोई बात नहीं

इस संदेश के बाद उतर ना आये

ऐसे भी हालत नहीं

बाँहों में

कहाँ हो मेरे यार

तेरे दिल में हु मेरे प्यार

ढूंढे नजरे तुझे मेरे यार

तेरी आँखों में छुपी है

मेरी तस्वीर मेरे प्यार

होटों पे सिर्फ तेरा ही नाम

ओ मेरे प्यार

लो चली आयी

तेरी बाँहों में मेरे प्यार

Thursday, April 21, 2011

नया गीत

मैंने साज नया गाना है

गीत प्यार भरा गुनगुनाना है

तेरी नस नस में

सरगम बन बस जाना है

तेरी धडकनों को

अपने प्यार भरे संगीत से सजाना है

मैंने गीत नया गाना है

लेखन

ज्ञानी नहीं अज्ञानी हु

फिर भी लिखने की कोशिश करता हु

दिल के भावार्थ को

शब्दों में पिरों

यादों के लिए रखता हु

ज्ञानी नहीं अज्ञानी हु

फिर भी लिखने की कोशिश करता हु

शर्माए दिल

ह़र झोकों में तेरा अहसास

ह़र फूलों में तेरा आकर

इतना मीठा तेरा साथ

पल पल शर्माए दिल

कर तुझको याद

Friday, April 15, 2011

जबाब

दर्द बिना


जिन्दगी का अहसास नहीं


जैसे


काँटो बिना गुलाब की पहचान नहीं


गुजरते लहमों में


बचपन की वो बात नहीं


जैसे


गम भुलाने के लिए


खारे आंसुओ का जबाब नहीं

बहाने

मुलाकातों के अवसर अक्सर तलाशते है


बातों के लिए बहाने तलाशते है


इश्क में ना जाने


लोग क्या क्या गुल खिला जाते है


चाँद को भी


महबूब के आगे फीका बतला जाते है

Thursday, April 14, 2011

दिल का तार

मेरी कविताओं में छुपे है


मेरी जिन्दगी के राज


ए कवितायेँ है


मेरी सच्ची भावनाओ की आगाज


जिसने जान लिया इनका आधार


छू लिया उसने मेरे दिल का तार

जाने अनजाने

जाने अनजाने


पुराने जख्म दर्द दे जाते है


घाव जो


फिर हरे हो जाते है


दिल को चुभों जाते है


पर


आंसुओं के मरहम में


सारे दर्द घुल जाते है

साये में

खुली जुल्फों के साये में


बारिस का लुफ्त उठा रहे है


ह़र बूंदों में सपने नये बना रहे है


काली घटाओं के दरमियाँ


आशियाँ नया बना रहे है


खुली जुल्फों के साये में


बारिस का लुफ्त उठा रहे है

ठंडी फुहार

तुम जीवन में बारिस की


ठंडी फुहार बन आयी


मुरझाते चमन में


खुशियों की बाहर बन आयी


दिल की वादियों में


प्यार की सौगात बन आयी


तुम जीवन में बारिस की


ठंडी फुहार बन आयी

इजहार

तेरी कातिल नजरों ने


चल दी अपनी चाल


तेरी मुस्कराहट पे


दिल हो गया कुर्बान


संग दिल अब ना बनो यार


अब तो कर दो


प्यार का इजहार

बाबरी

डगर डगर नगर नगर


पनघट पनघट फैली खबर


मीरा हो बाबरी


रटत फिरत है


ले श्याम का नाम


श्याम कहे मत भटक बाबरी


हम तो तेरे ह्रदय ही विराजमान

आँखों से

हम बंद आँखों से


आप का दीदार करते है


दिल जो तस्वीर बना है


उस कल्पना को


कविता में पिरों कर


ह्रदय में बसा लेते है

Tuesday, April 12, 2011

वर्णन

सुन्दर नाजुक कोमल तन


प्यार भरा मीठा मन


कमसिन जिन्दगी भोलापन


खिलता यौवन मुस्कराता बचपन


तेरे इस हसीन वर्णन में


झलक रहा मेरा समर्पण


करू तुझे मैं अर्पण


कह रहा मेरा मन

Saturday, April 9, 2011

दांव

रफ़्तार भरी जिन्दगी में

जिन्दगी को दफना दिया

छुट गया बचपन पीछे

छुट गए संगी साथी

भुला बिसरा खुद को

जिन्दगी को दांव पे लगा दिया

भीड़ भरे जमघट में

सिक्कों की खनखनाहट में

खुद को भुला दिया

Sunday, March 27, 2011

दिशाएं

ह़र कदम जो उठ रहा है


एक नयी मंजिल की ओर बड़ रहा है


दिशाएं अब अनजानी नहीं


ह़र कदम कारवां नया बन रहा है

कैसे

मेरे दर्द से तुने अगर नाता जोड़ा होता


खुदा तुने इंसा बनाया ना होता


पर तुने तो इंसा बनाये दर्द सहने को


इसीलिए मुझसे नाता कैसे जोड़ा होता

व्यवहार

जिन्दगी ने ह़र निराश कर दिया


जब जरुरत पड़ी


तब अपनों ने भी दरकिनार कर लिया


जिस जैसे अच्छा लगा


उसने वैसा व्यवहार किया


किसीने जिन्दगी का चीरहरण किया


किसीने आबरू का वस्त्रहरण किया


जिन्दगी ने ह़र पल सिर्फ निराश किया

मन ही मन

ज़िक्र जो तेरा चला


वक़्त कुछ पल को


थम सा गया जैसे


शांत धड़कने तेरे हुस्न के चर्चे


चुपचाप सुनती रही


मन ही मन तेरी तस्वीर बनाती रही

स्वांग

तेरे इश्क में जाने कैसे कैसे स्वांग रचाए


तरह तरह के रंग लगाए


तेरी आरजू को फिर भी


मुखोटे में छुपा ना पाये


नकाब सारे नाकाम हो गए


अफ़साने मोहब्बत सरेआम हो गए

दिलकश

तेरी दिलकश अदा दिल को भा गयी


तेरे नए नाम ने ना जाने कितने


दिलों पे छुरियां चला दी


तेरे हुस्न ने पानी में आग लगा दी


तेरी दिलकश अदा दिल को भा गयी

खिदमत

तेरे इश्क में ए इंसान बीमार है


भुला सब कुछ


तेरे हुस्न के नगमे गाने को बेताब है


तू जो हां कह दे तो


तेरी खिदमत को ए गुलाम त्यार है

Wednesday, March 16, 2011

गुजरा ज़माना

इश्क अपना गुजरे ज़माने की बात हो गयी

सदिया गुजर गयी

पर कशीश की महक

दिल की वादियाँ खिला गयी

सोयी यादों को फिर से जगा गयी

बृज

ओ हो रंग गयो बृज होली के रंग में

आ गयी राधा खेलन होली किशन के संग में

मारी भर भर पिचकारी राधा के अंग पे

रंग गयी राधा श्याम रंग में

झूमे गोपिया नाचे मोरिये

उड़ा गुलाल अबीर राधा नाचे किशन के संग में

ओ हो रंग गयो बृज होली के रंग में

दुआए

खुदा हम नहीं

पर चाहतों की सौगात लाये है

स्वस्थ रहे सभी

दुआए ऐसी साथ लाये है

शोले

मौजो की मस्ती से

साहिल के किनारे टूट जाते है

अश्को के सैलाब में

सारे गुम घुल जाते है

आंधी की मस्ती में

चमन के चमन उजड़ जाते है

प्यार के वयार में

नफरत के शोले दब जाते है

फागुन

रंगों की बाहर आयी

होली की मस्ती छाई

फागुन की रंगीन वयार में

मस्त हो गयी दुनिया सारी

रंग बिरंगो से रंग गयी

धरती आकाश सारी

उड़ते गुलाल बजते चंग की धमाल में

मद मस्त हो रंग गयी दुनिया सारी

अनमोल आंसू

आंसू बड़े अनमोल है

इन्हें यूँ ना जाया किया करो

ज़माने ने कब इनकी क़द्र जानी

वक़्त बेवक्त रो इनपे यूँ ना सितम ढाया करो

Friday, March 4, 2011

मीठी नींद

ओ निंदिया रानी बाहों में भर

मीठी नींद सुला दे

सपनों की दुनिया की सैर करा दे

माँ की वो लोरी

प्यारी थाप याद दिला दे

अंगडाई ले करवट बदलते तन की

थकान मिटा दे

भुला दुनिया सारी

एक मीठी नींद सुला दे

ओ निंदिया रानी

बाहों में भर मीठी नींद सुला दे

निंदिया

बोझिल तन करवटे बदले

पर निंदिया रानी पास ना फटके

अधखुली आँखे सोने को तरसे

पर निंदिया रानी पास ना फटके

सोने में खोने को आतुर रातें

पर निंदिया रानी पास ना फटके

गुजर गयी रात सारी

पर निंदिया रानी पास ना फटकी

विवशता

पूछता हु कई बार मैं खुदा से

आती जब मेरी बारी

लाचार क्यों हो जाते हो तुम तब

विवशता ऐसी भी क्या बन बन आती है

फ़रियाद मेरी तुमको सुनाई भी नहीं आती है

तिरंगे की शान

गुंजायमान हो धरती आकाश

विजय ध्वनि शंखनाद के संग

रहे ना कोई अनपढ़ गंवार

अलख परिवर्तन की जगे

मिले सबको शिक्षा का अधिकार

बने एक सभ्य समाज

हो देश को जिसपे नाज

विश्व शिखर पे लहराए

तिरंगे की शान

आलिंगन

गुजरते पलों के साथ

धूमिल होने लगा आशा का संचार

पर यकीन की लो अभी भी है बरकरार

उम्मीद की शमा बुझने से पहले

फ़रियाद मेरी भी होगी स्वीकार

खुशियों की किरणे बाहं फैलाए

आलिंगन करेगी मेरे विश्वास को आए

प्रबल अभिलाषा

अरमान आसमां छूने को है बेताब

ह़र कदम कामयाबी के

शिखर को चूमने है बेकरार

अध्याय जुड़े नया

प्रबल अभिलाषा ऐसी है खास

करने इस सुन्दर सपने को साकार

मह्त्वाकांछा के रथ पे हो सवार

फ़तेह अर्जित करनी है आज

वरदान

साया आप का नहीं आज साथ

पर दिल में है विधमान

आज भी आप ही की याद

हम चिरागों के दीये रोशन रहे सदा

आप की अनमोल यादों की परछाइयों के साथ

जन्म जन्मान्तर ऐसे ही बना रहे अपना साथ

देना आप ऐसा वरदान

किनारा

किनारा तुम से कर नहीं सकते

अहसास तुम्हारा भुला नहीं सकते

तुम मानो या ना मानो

सपने में भी हम

तुमसे इश्क लगाना छोड़ नहीं सकते

हिंसा

मचा हिंसा का तांडव ऐसा

धधक उठा नफरत का दावानल

किया हैवानियत ने ऐसा शर्मशार

पल में फैलया दिया अमावास का अँधियारा

ह़र ओर पसर गया मौत का सन्नाटा

हुडदंग शोरशराबे में

खो गयी मानव चीत्कार कहीं

मासूमो के खून से

रंग गयी देश की आन बान सभी

खत्म हो गया सब

बदल गयी पहचान


Sunday, February 13, 2011

रचना

कीर्ति रचना जो भी कहो

वया करती है सभी मन के विचार

उमड़ता है जब भावनाओं का सैलाब

नयी रचना लेती है तब आकर

पिरों सुन्दर शब्दों में

कलमबंद हो जाते है जब विचार

हो जाते है तब सपने साकार

नाम

ज्ञानी नहीं हु

फिर भी लिखता हु गीत नया

जाने कब बह पड़े

मीठे संगीत की रस भरी धारा

सरगम लगेगी जब बरसने

नाम मेरा भी तब लगेगा छलकने

उपहास

यादों की परछायिओं में

कुछ बातें अधूरी रह गयी

ठहठहांको के बीच

दिल की बात दबी रह गयी

ज़माना समझ ना पाया जज्बातों को

उपहास बना दिया मेरे अरमानों को

शब्बाब

कितना हसीन तेरा ख्याल है

जैसे खिला गुलाब है

उससे भी हसीन तेरे प्यार का अहसास है

जैसे चांदनी में लिपटा चाँद का शब्बाब है

खिदमत

दिल से हसीन नजरान ओर क्या पेश करू

ओ जानेजाना तेरी खिदमत में

प्यार भरा छोटा सा ए दिल पेश करू

अर्ज है इतनी सी

इसे तुम कबूल करो

मेरे प्यार को अपनी रूह में आत्मसात करो

बर्बाद

तेरे इश्क में बर्बाद हो गए

सरेआम बदनाम हो गए

सहानभूति की वजाय उपहास का शिकार हो गए

देवदास मजनू उपनाम चुपचाप सुनते गए

तेरे इश्क में बर्बाद हो गए

खुश

दुआ रब से है इतनी सी

तुम यू ही सदा मुस्कराते रहो

फूलों की तरह खिलखिलाते रहो

नज़र ना लगे किसीकी

तुम ऐसे ही सदा खुश रहा करो

Friday, February 4, 2011

तेरे नाम

संदेश में अपने जो तुने मिला दी होती


थोड़ी सी प्यार की मिठास


अपनी भी बन गयी होती बात


भुला सारी दुनिया


जिन्दगी कर दी होती तेरे नाम

बिन तेरे

जब तलक तुम सपनों में आती नहीं

नींद हमको आती नहीं

बिन तेरी धड़कने सुने

सुबह नींद हमको जगाती नहीं

Thursday, February 3, 2011

पितरी स्नेह

स्नेह प्यार के हम थे सात नीर

जैसे स्वर संगीत के सात तीर

छुटा आपका साथ

बिखर गया जीवन संगीत

सरगम है अब अधूरी

फिर भी गुनगुना रहे

आपके सिखाये गीत

नाज रहे आपको

हम है आपके जीवन मधुर संगीत

आप ऐसे ही बसे रहो

हमारे गीत संगीत बीच

जुड़े रहे हम सबोके दिल

आप के स्नेह ओर आशीर्वाद से

भरे रहे जीवन में

मधुर गीत संगीत

स्वतंत्रता

स्वछन्द विचरण मैं करू

गगन गगन उड़ता फिरू

पंख लग जाये दो

परवाज़ भरता फिरू

ना कोई सरहद

ना कोई सीमा

ज़हा ले जाये पवन का झोका

बादलों से अटखेलियाँ करता मैं फिरू

स्वतंत्रता की मिठास चखता चलू

गगन गगन उड़ता फिरू

वफ़ा

चाहतों को अक्सर तलबगार नहीं मिला करते

भूले बिसरे मिले कभी

वो वफ़ा निभा नहीं सकते

नफरत करने वाले मगर कभी दगा नहीं करते

मिले जब कभी

वो बेवफा बन नहीं सकते

करीब

सुबह की यादों में

रात की बातों में

ख्यालों में अक्सर होता है कोई

अनजाना ही सही

पहचान नहीं , आकार नहीं कोई

फिर भी दिल के करीब होता है कोई

खाब्बों में ख्यालों में

अक्सर होता है कोई

कुछ तो

कुछ तो बात है

दिल आज भी तेरे नाम है

गुजर गयी सदियाँ

बिखर गया कुनबा

फिर भी इसे तेरा ही इन्तजार है

कुछ तो बात है

Wednesday, January 26, 2011

नमन

बड़े चले कदम

करतल ध्वनी शंख नाद के संग

सुर ताल से मिला रहे कदम

विजय घोष के संग

लाज रखी मातृभूमि की

कर जिन्होंने अपना सर्वसर बलिदान

नमन आज देश करे

कर उन वीर शहीदों को याद

इजहार

चाँदनी रात में

चाँद तारों के साथ में

हाथों में हाथ थामे

में ए इजहार करू

ओ साथी तेरे प्यार को

में अंगीकार करू

प्रणय इस बेला

सिंदूर भर तेरी मांग संवारू

चमक

यू लगे सूरज को भी था तेरा ही इन्तजार

अब तलक था इसिलये काले बादलों के दरमियान

भेजा जो तुने प्यार भरा पैगाम

चमक उठा प्यार भरी मुस्कराहट के साथ

लाचार

दर्द को मेरे रबा तू एक बार गले लगा ले

आह निकलेगी ना आंसू

पल में तड़प जाओगे

में हूँ कितना लाचार

झट से समझ जाओगे

अब तक जो ना सुनी फ़रियाद

सुनने उसे फ़ौरन दोड़े चले आओगे

लुफ्त

बिजली चमके मेघा बरसे

काले बादल लाये घटाए संग सारी

गूंजे आसमां बहे पवन वेग सयानी

कहे मन क्यों ना इस मौसम में

दिल को करने दे अपनी मनमानी

खूब भींगे नाचे गाये

लुफ्त उठाये ढेर सारी

Tuesday, January 25, 2011

ठिठुरन

काले बादलों ने समां ऐसा बांधा

दिन में रात घिर आयी

मस्त पवन की लहरे

शीतल मोज़े ले आयी

ठिठुरन ऐसी बड़ी

लिहाफ की गर्माहट भी

कम नज़र आयी

अहसास

तलाशा मैंने तुमको बहुत

हवों में तेरी खुशबू टटोली

सायों में तेरा अक्स तराशा

चन्दा निहारा

दर्पण निहारा

खुद में तेरा अक्स नज़र आया

बंद कर आँखे

दिल से पुकारा

मेरी धडकनों में

अहसास तेरा पाया

गुस्ताखी

डर लगने लगा है तक़दीर से अब

किस्मत धोखा ह़र बार ऐसा दे जाती है

पास आयी मंजिल भी

कोसों दूर चली जाती है

बदकिस्मती रब ने ऐसी लिखी

फूल एक भी खुशियों के

अब तलक पिरों ना पायी

दिल भी छूने को आतुर मंजिल

पर इस नसीब को ए

गुस्ताखी रास नहीं आती

मयखाना

जाम से जब जाम टकराएगा

मयखाना छलक जायेगा

होटों पे आते ही

सरुर इसका छा जायेगा

भुला के दुनिया सारी

आगोश में अपनी ए छुपा लेगा

महफ़िल तब सजने लगे

रूह बन जब रगों में बहने लगे

मस्ती की हिलोरें आने लगे

मदहोशी का नशा जब छाने लगे

जाम से जब जाम टकराएगा

मयखाना फिर छलक जायेगा

स्तब्ध

खामोश कदम चलते रहे

उलझाने अपनी गिनती रहे

वीरानगी में आहट टटोलते रहे

मौत का सन्नाटा

गुजर रहे ह़र लहमों

सिरहन बन दोड़ते रहे

स्तब्ध मौन गुमसुम साँसे

खामोश क़दमों से ताल मिलाते रहे

आसरा

पूर्ण नहीं हु

कुछ कमी है मुझ में

रब तुने भी आज जतला दिया

औरो की तरह हँस

दिल तुने भी दुखा दिया

विश्वास का आसरा था जो

तोड़ उसको , जिन्दगी को

आंसुओं के सैलाब में बहा दिया

Thursday, January 13, 2011

अधूरी हसरतें

कोशिश कई बार की

हसरते पर अधूरी रह गयी

तेरी चाहत सरुर बन गयी

पर दिल की बात जुबां पे आने से चुक गयी

इस नादान दिल को कैसे समझाये

तुम जब भी सामने आयी

हम तेरे हुस्न को ही निहारते रह गए

ओर दिल की बात कह नहीं पाये

नियति

मंजिल मंजिल भटक रही जिन्दगी

आसरा मिला नहीं कोई

पनाह मांगती जिन्दगी

कदम अब थक गए

टूट गयी जिन्दगी

रुक मैं सकती नहीं

आखरी सांस तक चलना ही तेरी नियति

कह रही जिन्दगी

मंजिल मंजिल भटक रही जिन्दगी

उम्मीद

नया जोश नयी तरंगे

नयी मस्ती से सराबोर

नए साल की उमंगें

रंग भरी आतिशबाजी से सजी

रंगीन आसमान की सलवटे

संगीत की धुनों पे थिरकते चाँद सितारे

जशन में डूबी मस्ती भरी साँसे

गले लग उड़ेलती मस्ती भरी बाते

नया साल नयी उम्मीदें

छोर

एकान्त समुद्र का किनारा

उफनती सागर की लहरों का शोर

भंग कर रही दिल के बोल

अथाह सागर की मौजा का सहारा

नीले पानी के खारे बोल

मन ढूंड रहा अपना छोर

दीवाना

इस कदर आपने हमको दीवाना बना दिया

जिन्दगी का ह़र लहमा यादगार बना दिया

इस बेजान दिल में प्यार का रंग बरसा दिया

हमको भी प्यार करना सीखा दिया