Thursday, December 23, 2010

विष का प्याला

मीरा पी गयी विष का प्याला


रटते रटते कृष्ण नाम तुम्हारा


लाज रखी तुमने प्यार की


विष बन गया अमृत प्याला


जीत गयी मीरा की प्रेम गाथा


मीरा तो रटे बस नाम तुम्हारा

प्रीत रागिनी

सुन के तेरी प्रीत रागिनी

तेरे प्यार भरे ख्यालों में

खो गयी दुनिया सारी

छू गयी तेरी हँसी दिल को

बोल उठी खामोश जुबाँ भी

साया बन थामा जो हाथ

होने लगा प्यार का कमाल

मुर्दा दिल भी जाग उठा

कहने लगा

तू ही मेरे दिल की साज

तू ही मेरा प्यार

चकित

भरी सभा द्रोपदी का चिर हरण होने लगा जब

हाथ जोड़ याद किया कृष्ण को तब

साड़ी का आँचल इतना बड़ा दिया

थक हार गए कौरव सारे

मिला ना अंत छोर साड़ी का

देख कृष्ण तेरी माया

चकित रह गया जग सारा

कृष्ण-राधा

कृष्ण की बांसुरी ताल पे

ता था थैया नाचे राधा रानी

नंदनवन रास रचावे कृष्ण मुरारी

सखिया संग झूमे राधा रानी

संगम तट खेले कान्हा त्रिपुरारी

संग आँख मिचोली खेले राधा रानी

है जग में विख्यात इनकी प्रेम कहानी

बिन राधा अधुरा मुरारी

गुमान

गुमान नहीं अभिमान है

मेरे पिता पे मुझे नाज है

झुके नहीं टूटे नहीं

विपता जब भी आयी

शूरवीरों की तरह डटे रहे

साथ छोड़ चले गए अपने भी जब सभी

हिम्मत हारी नहीं तब भी कभी

आत्मविश्वास के बलबूते

पाली पुन: शोहरत सारी

धूमिल हो गयी थी जो

विपति काल में

आने वाला

ए दोस्त तू यू ही हमदम बना रह

मुस्कराते हुए चलता रह

आने वाला ह़र पल तेरा है

प्यार के संग इस जीता जा

सोहब्बत

सोहब्बत का असर है हमारी

रेगिस्तान में गुलाब खिला दिया

ओर बुझे बुझे दिल को

प्यार करना सीखा दिया

Tuesday, December 21, 2010

अंकित

उत्साह उमंग लाये

निर्झर मन में खुशियों की सौगात

नाचे मन , मारे हिलोरे दिल की लगी

वर्णित हो नहीं सकती शब्दों में

अंकित हो गयी दिल में जो घड़ी

जिन्दगी का साथ

कितना मुश्किल है जिन्दगी का साथ

कभी सोचा है मेरे यार

किस पल हँसा दे

किस पल रुला दे

कोई कह नहीं सकता मेरे यार

किस पल रुसवा हो

अलविदा कह दे जिन्दगी

कोई जान नहीं सका मेरे यार

जादू

जब जब तेरा जिक्र चले

चहरे पे मुस्कान जादुई बिखर जाये

आँखों की शरमों हया

पलके बंद कर

दिल ही दिल तेरी तस्वीर बनाये

मुख मंडल लगे दमकने ऐसे

चन्दा से चाँदनी छिटक रही हो जैसे

रब

जब रंग लहू का एक

फिर कैसा महजब का फैर

मंदिर हो या मस्जिद

सब में बसे एक ही रब का नाम

अल्लाह कहो या राम

सब के दिल में हो बस प्यार का ही नाम

प्यार में ही बसे अल्लाह और राम

साँसे

गए खफा हो तुम जबसे

साँसे रुकी हुई है तबसे

रुसवाई ने तेरी हमको रुला दिया

मोहब्बत क्या होती है

हमको बता दिया

अब ओर ना हमको रुलाओ यार

लौट आओ मेरे प्यार

मेरी साँसे कर रही है तेरा इन्तजार

सादगी

तेरे हुस्न की सादगी पे हो फ़िदा

चाँद ने चाँदनी की चुनर उढाई

सितारों ने जगमग करते तारों से मांग सजाई

मंत्र मुग्ध हो दर्पण भी शर्माए

ओ मेरे दिल की रानी

तेरी सादगी के कुदरत भी है हारी

Monday, December 13, 2010

बीते लहमे

जब भी मुस्कराना चाहा

जिन्दगी ने रुला दिया

जख्मों को फिर से ताजा बना दिया

सितम बीते लहमों ने ऐसा डाह दिया

आने वाला ह़र पल मनहूस बना दिया

जब भी मुस्कराना चाहा

जिन्दगी ने रुला दिया

सहेली

ओ सहेली तुम हो कैसी पहेली

सपनों में रोज आती हो

दिल पे दस्तक दे जाती हो

ज्यों ही पलक झपके

तुम फुर से उड़ जाती हो

अपनी जादुई मुस्कान से

दिल गुदगुदा जाती हो

सपनों की दुनिया में

प्यार भरी दुनिया बसा जाती हो

ओ सहेली तुम हो कैसी पहेली

Friday, December 10, 2010

बात बनती

कुछ कहते तुम भी

तो कोई बात बनती

प्यार नहीं तो

रणभेरी गूंजती

प्यार और तकरार में

कोई तो बात बनती

मासूम कलि

ओस की शबनमी बूंदों में लिपटी

मासूम सी कलि

खिलखिलाए महकाए चमन

जब छुए सूरज की रौशनी

नयी राह

यादों ने तेरी फिर अलख जगा दी

पैगाम ने तेरे बुझते दिए को लो थमा दी

शमा ने जीने की

नयी राह दिखला दी

सर की कसम

जिया ऐसे फिर ना तड़पाना

हमें यू ना मार डालना

तेरे सर की कसम

तेरे लिए कुछ भी जायेंगे

सारी दुनिया से अकेले लड़ जायेंगे

दिल में

आँखों में शरारत

चहरे पे मुस्कान

कुदरत ने भर दी सारी कायनात

तेरे छोटे से प्यार भरे दिल में लाय

लय

संगीत की लय तुमने बिखरा दी

गीत बनने से पहले धुन चुरा ली

बिन संगीत

नगमे गुनगुनाये कैसे

तेरे दिल में अब घर बनाये कैसे

संगीत की लय तुमने बिखरा दी

अलख

सपने दिखा दिखा

नींदे आपने चुरा ली

अब सोये कैसे

प्यार की अलख आप ने जगा दी

गलती

उस राह कभी ना जाता

जो कभी मेरी मंजिल ना थी

पर ह़र कदम सपने टूटते गए

कदम निराशा के भंवर में

खुद ब खुद गर्त की ओर चलते गए

ना किसी से कभी कोई गिला रही

ना किसी से कभी शिकायत रही

अपने कदम रोक ना पाया

उसमे औरों की क्या गलती थी

बिडम्बना

ह़र पल टूटा हु

खुद से खुद को जोड़े

फिर भी खड़ा हु

है ए अजब बिडम्बना

गम भुलाने को रो भी ना पाऊ

जी रहा हु

पर जिन्दा कैसे रह पाऊ

कैसे

कैसे ए दर्द भरी दास्ताँ पेश करू

जख्म तुने जो दिए

कैसे उन्हें पेश करू

दर्द ए दिल कैसे पेश करू

तुझे भुलाने को

क्या में ओर करू

कैसे उस बीते लहमे को पेश करू

आपसे

नजरे मिला नजरे चुराना कोई आपसे सीखे

रोते दिलों को हसना कोई आप से सीखे

काँटो में रह के भी

गुलाब की तरह मुस्काना कोई आप से सीखे

Wednesday, December 8, 2010

लगन

लागी तुझसे लगन

वो अनजाने सनम

खबर ना मिले जब कोई

घबराने लगे मन

मांगे रब से

तेरी सलामती की खबर

ओ अनजाने सनम

लागी तुझसे लगन

Tuesday, December 7, 2010

घनचक्कर

छुट गयी ह़र आदत

बदल गयी जिन्दगी

जब से मिली अनबुझ पहेली

सब गड़बड़ झाला हो गया

पहेली सुलझाने के चक्कर में

खुद घनचक्कर हो गया

मेरा साथ

छोड़ो ना तुम मेरा साथ

घबराए जिया

देख परछाई अपनी भी अकेले माये

रहे जो हाथ तेरे हाथ

दिखती है फिर आस

तेरे प्यार के सहारे

लग जायेगी जीवन नैया पार

में करता हु तुमको अंगीकार

तुम भी करलो मुझको स्वीकार

छोड़ के जाओ नहीं मेरा साथ

तेरे लिए

तेरी खुशियों की दुआ माँगा करेंगे

सजदे में उसके सर झुकाया करेंगे

तुम सलामत रहो सदा

परवरदिगार से बस ये ही माँगा करेंगे

बदनाम

कुछ रिश्ते बेनाम होते है

ऐसे रिश्ते अक्सर बदनाम होते है

इन रिश्तों को ओर कोई समझ सकता नहीं

इसलिए ऐसे रिश्तों को बदनाम करते है

ठिकाना

ना ठोर है ना ठिकाना है

जहा मिल जाये आसरा

वो बसेरा सपना है

ह़र रोज एक नया सबेरा है

छोटे से इस जीवन में

ना कोई अपना है

ना कोई पराया है

जिन्दगी बस ऐसे ही

चलते जाना है

Sunday, December 5, 2010

बदले बदले

बदले बदले से जनाब नज़र आये

रिश्ते नए क्या मिले

बदले बदले सुर नज़र आये

नए रिश्ते की सौगात में

पुराने दोस्त नज़र ही ना आये

रुख

रुख हवओं ने बदला

जिक्र तेरा जो चला

ठहर गयी राहें

जादू तेरा जो चला

खिल उठी कलियाँ

अहसास तेरा जो हुआ

छुप गया चाँद

नूर तेरा जो दिखा

Saturday, December 4, 2010

जिक्र

कोशिश जितनी भी की भुलाने की

तुम उतनी ओर करीब आयी

चाहत जूनून बन गयी

नफरत शोला बन गयी

आरजू इतनी रही

तुम रहो जहाँ भी

सदा सलामत रहो

पर जिक्र

दिल से दूर जाने का ना करो

Friday, December 3, 2010

जज्बात

जज्बातों के भंवर में उलझी जिन्दगी

सितम सह सह खत्म हो गयी जिन्दगी

अपनों की कटु वाणी ने घायल कर दी जिन्दगी

बेंधे ऐसे तीर

डूब गयी आंसुओं के बीच जिन्दगी

मुलाक़ात

गुम हो गयी पहचान

तलाश अभी जारी है

अजनबियों के बीच

खुद से एक मुलाक़ात अभी बाकी है

इन्तजार

सदी गुजर गयी तुमको देखे हुए

रौशनी थक गयी आस निहारते हुए

अक्स दिखा चाँद के दीदार में

बाहें खुली है तेरे इन्तजार में

सिसकियाँ

सुबक सुबक सिसकियाँ भरते रहे

हाले गुम भुलाते रहे

टूटे दिल को सहलाते रहे

जख्म फिर भी भर नहीं पाये

जिन्दा अब कैसे रहे

खुद को कैसे ए बतलाये