Tuesday, November 30, 2010

सर्दी

रिम झिम रिम झिम वर्षा आयी

मौसम ने ली अंगडाई

लो आ गयी सर्दी रानी

बड़ ने लगी ठिठुरन बेचारी

कंपकंपाने ने लगी देह सारी

शीतल ठंडी फुहारों ने

बदल दी रंगत सारी

दस्तक दे दी ठंडक ने

कह रही घटाए सारी

Saturday, November 27, 2010

तन्हाई

तन्हाई में घिरे

तन्हा अकेले बैठे रहे

मंथन विचारों का चलता रहा

खामोश लब गुमसुम से

दिल की धड़कने गिनते रहे

अकेलेपन की तन्हाई में

क्यों गुम हो गयी जिन्दगी

जबाब इसका तलाशते रहे

कॉल गर्ल

बिक रही औरत मंडी में आज भी

कोई हवस की खातिर

कोई पैसे की खातिर

बस स्वरुप इसका बदल गया

नाम नया इसको मिल गया

कोठी के जिन्ने , तवायफ की कहानी

बात ए सदियों पुरानी

अब चर्चे रोज नए होते है

जिस्मफरोशी के इन खिलाडियों को

कॉल गर्ल कहते है

कहानी

बज रहे है ढोल

मच रहा है शोर

चुपके से आया कोई चोर

चुरा ले गया शहजादी का नूर

हो रही मुनादी

जिसने की है ए गुस्ताखी

शहजादी करेगी उससे शादी

चोर ने नहले पे दहला मारा

आधी रात शहजादी की मांग भर आया

देख इस दुह्साहस को

शहजादी का दिल उसपे आया

उससे अपने सपनों का राजकुमार बनाया

प्रेरणा

तेरी प्रेरणा से

ह़र शब्द छंद बन गया

स्वर मीठे रस से भरे बोल बन गए

कदम स्वत: ही

मंजिल की ओर चल दिए

दुनिया देखती ही रह गयी

ओर हम कामयाबी के शिखर पहुँच गए

छूना

चन्दा छू लू सूरज छू लू

छू लू धरती आकाश

छू ले जो तू इस दिल को

ना फिर छूऊं किसी ओर को

किसी भी सूरते हाल

Friday, November 26, 2010

जिक्र

जिक्र तेरा जो चला

महफ़िल में रौनक आ गयी

खामोश लबों पे भी

तेरी ही बात छा गयी

एक तेरे ही जिक्र से

बेजान महफ़िल में भी जान आ गयी

तेरा पता

काश तेरा पता मिला होता

ख़त तेरे नाम लिखा होता

हाले दिल वयां किया होता

एक अजनबी से दिल लगाने का दर्द ए हाल लिखा होता

दिल के दर्द का अगर दर्द पता होता

खुदा कसम दिल ना लगाया होता

काश तेरा पता मिला होता

अमन

सरहदे दोस्ती को बाँध नहीं सकती

फासले कितने भी हो वतनों में

यारों के मिलन को रोक नहीं सकती

पैगाम है ये अमन का

दूरियां इसे मिटा नहीं सकती

सौदागर

खाब्बों का सौदागर हूँ

खाब्ब सजाता हूँ

सपनों की रंगीन दुनिया में

हसीन महफ़िल सजाता हूँ

ह़र दिलों के राज को

खाब्ब बना आँखों में सजाता हूँ

जिसके जिक्र से दिल खिल उठे

ह़र उस खाब्ब को हकीकत बनाता हूँ

खाब्बों का सौदागर हूँ

खाब्ब सजाता हूँ

Wednesday, November 24, 2010

पहचान

एक तुझ से ही पहचान है

बाकी सब गुमनाम है

नाज है अभिमान है

तुम पिता हम तेरी संतान है

ह़र जन्म जुड़ा रहे

एक दूजे से अपना नाम

छोटी सी रब से ये फ़रियाद है

बस एक तू ही पहचान है

ताबीर

कुछ खोया खोया से लगे

दिल अपना बेगाना सा लगे

चाहत की ये ताबीर है

एक नए रिश्ते की तामिल है

धड़क रहा जिया

फिर भी गुमसुम सी धड़कने सारी है

एक मीठी सी अहसास है

उमंगों की बारिस में दिल

प्यार के लिए बेकरार है

भश्मासुर

तू डर नहीं निडर बन

आगे बड़ मुकाबला कर

ललकार उन दरिंदो को

जो खले अस्मत से नारी की

पल में सारे मर जायेंगे

तेरी क्रोध अग्नि में सारे भश्मासुर

भस्म हो जायेंगे

सुन्दर जहाँ

आओ ऐसा सुन्दर जहाँ बनाये

ह़र घर फैले उजिआरा

ऐसे सूरज की ह़र किरणे सजाये

आभा बिखरे जिससे

शीतल सुप्रकाश की

ओर जगमगा उठे जग सारा

इन्तहा

जख्म तुने इतने दिए

इन्तहा सजा की हो गयी

अब तो दर्द भी दर्द ना रहा

इसकी तो आदत सी हो गयी

अब ना आंसू बचे

ना जीने की तमन्ना ही रही

जुल्म सहते सहते

जिन्दगी जिन्दा लाश हो गयी

Monday, November 1, 2010

नतमस्तक

समर्पण करूँ , अर्पण करूँ , तर्पण करूँ

हे रब तेरे आगे सर नतमस्तक करूँ

कुछ भी कहे दुनिया

सबसे पहले मात पिता की पूजा करूँ

अंश हूँ उनका

आज्ञा उनकी शिरोधार्य करूँ

बिमुख तुमसे हूँ नहीं

अहंकारी मुझको समझना नहीं

उनके रूप में ही तेरे दर्श पाऊ

समर्पण करूँ , अर्पण करूँ , तर्पण करूँ

हे रब तेरे आगे सर नतमस्तक करूँ

रौशनी

दीपों की रौशनी

पटाखों का शोर

घोल रही रिश्तों में

चीनी का घोल

ले आयी दिवाली फिर

मस्ती भरी उमंग

जगमग हुआ जहां

रोशन हुए दिल

रंग बी रंगी आतिशबाजी से

अम्बर हुआ रंगीन

मिलन की आस

सितम तेरे सारे सहते रहे

तेरी सलामती की दुआ फिर भी माँगते रहे

अश्को ने भी छोड़ दिया साथ

पर गुजरे लहमे याद कर मुस्कराते रहे

खत्म हो गयी जिंदगानी जलते जलते

पर साँसे बची है अब तलक

तेरे मिलन की आस लिए

तू ही तू

तुम इस दिल की कविता बन गयी

रग रग में यूँ समां गयी

जुबा जब भी खुली

ह़र लफ्ज में तू ही तू नज़र आयी

इस कदर तेरी दीवानगी छाई

ह़र फूल में तू ही तू नज़र आयी

जन्म जन्म

तेरी याद में

साँसे अगर छोड़ दे साथ

गुजारिश है हमारी छोटी सी फ़रियाद

कब्र पे हमारी जब भी आना

फूल जरुर साथ लाना

इंतकाल का बाद

कब्र अपनी हमारे पास बनवाना

वादा जन्म जन्म साथ निभाने का

मौत के बाद भी निभा जाना

कहानी

ह़र शबनम की अपनी जिंदगानी है

कलि से फूल बनने की कहानी है

छोटी ही सही

अफ्सानो से भरी ह़र जवानी है

प्यार

आ तुझे इतना प्यार में करू

साँसे अपनी तेरे नाम करू

दरमियाँ रहे ना कोई फासले

बाहों में तुझको छुपालू

आँखों में कैद कर

दिल में तुझे बसा लू

आ तुझे इतना प्यार में करू