Tuesday, February 2, 2010

गोविन्द

कृष्ण मनोहर माधव गिरधारी

हरे गोविन्द हरे मुरारी

हे कलयुग अवतारी हे त्रिपुरारी

सुनले विनती हमारी कह रही सखियाँ सारी

बृज मंडल पधारो हे मौर मुकुट धारी

खेलन होली आयी राधा ले पिचकारी अपने साथ

हम रंगे तुमको प्रेम रंगों में

तुम रंगों हमको श्याम अपने रंगों में

सुनके हमारा विनम्र निवेदन

खेलन होली आ जाओ हे नाथ

कृष्ण मनोहर माधव गिरधारी

हरे गोविन्द हरे मुरारी

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