Tuesday, December 22, 2009

प्रभात

कर रहा हु इन्तजार

ढल रहा है दिन हो रही है शाम

होगा भाग्य उदय कल तो

कह रहा है मन ये बार बार

किया नहीं जब कोई अनुचित काम

निश्चय ही रब देगा मेरा साथ

निराश अभी हुआ नहीं

फैलाये बाहे कर रहा हु

एक नए प्रभात का इन्तजार

लड़क्प्पन की कहानी

चलती है जब बात पुरानी

याद आ जाती है लड़क्प्पन की कहानी

चंदा की वो कहानी जिसे सुनाती थी माँ

माँ के ममता में लिपटी वो लोरी की रागिनी

सुनके जिसे सो जाते थे माँ के आँचल में

अब ना कभी लोटेगी वो जिंदगानी

जब भी चले कोई बात पुरानी

याद आ जाती है लड़क्प्पन की कहानी

आत्मा

कहा दु:खी आत्मा ने भटकती आत्मा से

क्यो न हम तुम मिल जाए

कुछ तो दुनिया का भला कर जाए

अकेले अकेले सताने से अच्छा

दोनों मिल दुनिया को सताए

मज़ा आयेगा खूब

सिसकिया भरती आत्माओ

से जब होगी मुलाकात

चिंतामणि

है प्यारे बड़े ही चिंतामणि

चिंता से ये कभी मुक्त होते नहीं

नाम पड़ा इसीलिए चिंतामणि

ख़ुद की चिंता इनको सताती नहीं

देख दूसरों की खुशिया

मारे चिंता नींद इनको आती नहीं

ऐसे है अपने प्यारे श्रीमान चिंतामणि

Thursday, December 17, 2009

माया

माया के मायाजाल में फंसा जो

मायाजाल के महापोश से बच न सका वो

लालसा खत्म होती नहीं

लालच कभी मरता नहीं

दलदल माया का ऐसा

इससे कोई निकल पाता नहीं

चक्रव्यू ऐसा बाहर का मार्ग नजर आता नहीं

माया से मुक्ति इतनी आसान नहीं

माया के बिना रह पाना भी आसान नहीं

एतबार

जब जब किया एतबार

तब तब तुने किया विश्वासघात

अब बेहतर हो यही

राहे चले अपनी अपनी

तुम निकल पड़ो अपनी राह

मैं चल पडू अपनी राह

अब ना कभी मिले

आओ ऐसी राह पे चले

मंत्र

सोई किस्मत जागे तभी

मंत्र ऐसा कोई जब पढू कभी

खुलने लगे बंद किस्मत के ताले

कुंजी ऐसी मिले जब कहीं

सफलता के राज छुपे हो जिसमे

मिला ना वैसा मंत्र अभी तलक

तक़दीर की कहानी

क्यो करते हो रब मेरी किस्मत से मजाक

क्यो छल जाते हो मेरे को ही हर बार

क्यो लोट जाती है खुशिया मेरे ही द्वारे आए

हे रब कैसे तुम को बतलाऊ

पीड़ा कैसे तुम को दरशाऊ

जब तुम ख़ुद ही अन्तर्यामी

क्यो नही बदल देते

किस्मत की मारी तक़दीर की कहानी

बदकिस्मत

क्यो हु मैं इतना बदकिस्मत

कोशिश जी जान से करू

कमी रखु न कोई ना कोई कसर

फिर हर बार क्यो मिले असफलता

कुदरत ने शायद तक़दीर में कामयाबी लिखी नही

कामना सफलता की इसलिए काम ना आए

इस गहरी चोट को जुबां से वयां किया जा ना सके

रंग

मच गई मच गई रंगों की हुडदंग मच गई

भर गई भर गई रंगों की पिचकारी भर गई

रंग गई रंग गई रंगों के रंग में दिल की किताब रंग गई

रंगी रंगी ऐसी रंगी हर पन्ने प्यार के रंगों से रंगी

खिल गई खिल गई रंगों की रंगत खिल गई

छा गई छा गई रंगों की मस्ती छा गई

भा गई भा गई दिल को भा गई रंगों की रंगीनी भा गई

रंग गई रंग गई रंगों की बारिस में हर चाहत रंग गई

दिलजले

आग लगनी हो दिल को

तो याद करो हमको

हमसे बेहतर है कोई नही

हुनर ऐसा लाजबाब

ख़बर हो जब तक आप को

जल उठा होगा दिल तब तलक

प्यार की इबादत करते है हम

तितलियों के दिलो में रहते है

दिल जलाने को ही दिल लगाना समझते है

इसिलये दिलजले कहलाते है हम

Tuesday, December 15, 2009

बातें

बातें थी ढ़ेरों करनी

किस्से कहानिया थी वया करनी

बतलानी थी वो बात

जिस बात में छुपे थे सारे राज

अहम् थी ये बात

जो बात बतलानी थी आज

हो ना पाई कोई बात

दफ़न हो गई वो राज की बात

रह गई ख्वाइश अधूरी बातों की आज

फिर ना कभी हो पायेगी ये बात

बात जो कहनी थी आज

सिमट गई दुनिया बातों के जंजाल में आए

बंद हो गया सदा के लिए बातों का पिटारा आज

थम गया सिलसिला बातों का इस मुकाम पे आए

खत्म हो गई सारी बातें

अब ना बची कोई बात बतलाने को

कैसे

चाहा सिर्फ़ तुम्हे ही है

सोचा किसी ओर के बारे में नहीं

यकीन कैसे तुमको दिलाऊ

कैसे सीना चिर तुमको दिखलाऊ

दुनिया मेरी होती है तुमसे ही शुरू

खत्म भी होती ही तुम पे ही आके

यारा अब तो मेरा यकीन करो

सप्ताह

सप्ताह के है सात दिन

छ: दिन झगड़ा एक दिन प्यार

कैसा अनोखा है ये संसार

झगड़े बिन चैन नहीं

प्यार में फिर भी कोई कमी नहीं

कहना है बस इतना सा

क्यो झगड़े सप्ताह के सातवे दिन

सजा

बिन खता सजा क्यों मिली

वफा के बदले रुसवाई क्यों मिली

ऐसी भी क्या बात हुई

चाहत के बदले नफरत आन मिली

Monday, December 14, 2009

खरोंच

बिछुड़ गए दिलो के तार

छुट गए हाथो से हाथ

कमजोर थी बिस्वास की डोर

टूट गई रिश्ते की डोर

लगी जो हलकी सी खरोंच

हो गई राहें जुदा जुदा

मिल न सके फिर कभी दुबारा

ज्यो हो सागर तट का किनारा

मगरूर

मगरूर इतने भी ना बनो

कुछ दिखलाई ना दे

ठोकर लग जब गिरो

कोई रहनुमा भी दिखाई ना दे

सैलाब

दर्द जब हद से गुजर जाता है

चहरे पे चला आता है

सारी हदे तोड़

आँखों से सैलाब बन

उमड़ पड़ता है

गुमान

गुमान इतना अच्छा नहीं

आनी जानी जब कुछ नहीं

फितरत भी बदल जायेगी

ठोकर जब अहंकार को लगेगी

जो क़द्र करोगे भावनाओं की

कदमो में दुनिया सारी होगी

अदाकारा

आरजू हैं फिरू वन वन

उदु तितली बन बन

छू लू धरती आसमा को

अदाकारा ऐसी बनू

हुनर से अपने जीत लू दिल सबका

अधूरी हसरतें

दिल तलाशता रहा

दीदार उनका हो ना सका

जिनके ख्यालो में जिन्दगी डूबी रही

मिले जिन्दगी के ऐसे मोड़ पे

नजरे प्यासी की प्यासी रह गई

मिलन की हसरतें अधूरी की अधूरी रह गई

खट्टास

रिश्तो में खट्टास ऐसी आई

शहद सी घुली बातों में भी

करेले की कडवाहट नजर आई

रिश्ते जो लगते थे मिश्रि से मीठे

लग रहे निम् से कडवे अब

ऐसी क्या बात हो आई

बातों में जहर की महक चली आई

चाहत की जगह नफरत चली आई

एक पल

जिन्दगी हसीन हो गई

हर शाम रंगीन हो गई

तुम जो मिले तो तन्हाई दूर हो गई

एक पल के लिए ही सही

जिन्दगी अपने आप से रूबरू हो गई

काँटो का ताज

हो जिसके सर काँटो का ताज

कैसे फूल आए उसके पास

दर्द लिखा हो जो किस्मत में आए

तो कैसे आए महबूब उसके पास

विडम्बना

कैसी है ये अजब विडम्बना

तुम पास होके भी कोसो दूर हो

फासले नहीं फिर भी फासलों पे हो

सदिया बीती तुमसे मिले

नयना तरसे तुमसे मिलने

हसरत हुई ना पूरी

तमन्ना भी रह गई अधूरी

न जाने क्यो वक्त ने किया सितम

तुमसे मिलके भी ना मिले हम

दाम्पत्य

बजती रहे शहनाई छूटते रहे पटाखे

सदा भरा रहे दाम्पत्य खुशियों के आँचल से

मनोकामना है हमारी

सात फेरो का बंधन

बना रहे सात जन्मो तक

चीत्कार

सुनके बेबस चीत्कार

जिन्दगी सिहरन उठी

मानसिक यातना दे

अच्छे भले को भी रोगी बना दिया

देख मन विचलित हो गया

पुकारा रब को पूछा

कहाँ छिपे बैठे हो

चीत्कार तुम्हे सुनाई क्यो नहीं देती

क्यो मदद को आ नहीं रहे आज

सुनके ललकार रब दौड़े चले आए भक्त के पास

रख सर पे हाथ मिटाए सारे संताप

अनावरण

वो संगम भी क्या खूब होगा

जब दो दिलो का मिलन होगा

चकित रह जाएगी दुनिया

जब दो प्रेमियों का मिलन होगा

मिलन कुछ ऐसा होगा

मधुर रस की नदिया बहेगी

बस ओर कुछ नहीं

एक नई प्रेम कथा अनावरण होगी

Sunday, December 6, 2009

दिल की गिटार

क्यों हो रही हो खफा यार

बजने दे दिल की गिटार

बुला रही है तुम्हे मेरे दिल की सितार

चली आओ जाने बहार

मौसम भी खुश मिजाज

तेरे संग की मुझको है दरकार

भुला के सारी बात

सुनले प्रेम आलाप

मधुवन में कर रहा हु तेरा इन्तजार

तुम ही हो मेरी जाने बहार

मिलने तुमको नाच रहा है

मयूर मन बार बार

उड़ के चली आ मेरे पास

सुनाऊ तुमको प्यार भरी राग

शरीर

जल उठी चितां

खाक हो गया शरीर

पञ्चतत्व से बना तन विलीन हो

राख में हो गया तब्दील

नश्वर तन था

छोड़ गया प्राण शरीर

अमर थी आत्मा

धारण कर लिया दूसरा शरीर

अकेलापन

क्यों दर्द इतना गहरा होता है

क्यों अकेलापन इतना बुरा होता है

क्यों अखरती है जिंदगानी

जब ख़ामोशी चुपके से दस्तक दे जाती है

कैसी ये घड़ी होती है

सब होते हुए भी ना होने का अहसास जगाती है

Friday, December 4, 2009

कुछ कमी

कुछ कमी है जिंदगानी में

अहसास खालीपन का जगा रही है

चेतना शुन्य दृष्टि बेजार हो रही है

हर पल चिंता शक्ति क्षिण कर रही है

घबरा रहा है मन देख ये बुरे लक्षण

सच यारों कुछ कमी तो है जिंदगानी में

याद में

मुमताज जो तुम होती

शाहजहाँ मैं होता

तेरी भी याद में

एक ताजमहल बना होता

Thursday, December 3, 2009

अंतर्मन की व्यथा

चिंता की लकीरे मस्तस्क पे उभर आई

देख के हश्र जिन्दगी का

अंतर्मन की व्यथा मुखरित हो आई

आतंक का ग्रास बन रहा है मानव

सभ्य समाज में ये पीड़ा कहा से चली आई

कहीं इस काल की परछाई

हमारे अपने ही विचार धाराओ की उपज तो नहीं

सोच सोच ये चिंता मन को खायी

भय मुक्त समाज की रचना करने हेतु

किसीने तो करनी होगी पहल आगे आय

इसलिए ले लिया निर्णय ये आज

जलाऊ एक ऐसी मशाल

भस्म हो जाए जिसमे सारे आतंकवाद

कौम के लिए बन जाऊ एक मिशाल

रणबाँकुरे

बगावत की आग ऐसी जली

विद्रोह की विगुल बज उठी

हुंकार रणबाँकुरे ने ऐसी भरी

रणभेदी बाज उठी

फ़ैल गई ख़बर हर ओर

सज गई फिर समर भूमि

रणयोद्धाओ के शौर्य की

पराक्रम की कहनी अब लिखी जानी है

इतिहास में एक नए अध्याय की

इबादत लिखी जानी है

लडकिया या तूफ़ान

कहर बरपाती है चक्रवर्ती तूफ़ान

तभी तो इनके नाम है लडकियों के नाम

मच जाती है विनाश लीला

छा जाती है तबाही

जब पहुँच जाती है लडकिया या तूफ़ान

विनाश का तांडव दिखलाना

मौत के बबंडर उडाना

ही तो है इनका काम

तो फिर क्यो ना हो नाम इनका एक समान

Wednesday, December 2, 2009

अभियान

हो कामयाबी के अश्व पर सवार

निकल चला एक नए अभियान

करनी है दुनिया फतह आज

बस यही एक लक्ष्य है पास

रुक ना सके अश्वमेघ ये

बिन अर्जित किए बुलंदिया शोहरत की प्यास

नाज हो मुझको भी

याद रखे दुनिया मेरे को भी