Saturday, October 31, 2009

इन्तजार

इन्तजार उनका का किया

रात ढलने को आई

शमा बुझने को आई

पर कोई पैगाम ना लायी

बैठे रहे जिनके इन्तजार में

बेमुरबत वो ना आई

ऐसी भी क्या बेरुखी दिखलाई

की एक पल के लिए उनको

हमारी याद भी ना आई

भुलाना

भुलाना तुझे बहुत चाहा

पर भुला ना पाये

बीते लहमो को भूल ना पाये

कोशिश की मगर

यादो के झरोके को बंद ना कर पाये

ख़ुद को तुझ से जुदा ना कर पाये

अहसास तेरा भुला भुला ना पाये

कहने को नफरत भी की

फिर भी तुझको भुला ना पाये

चाहा तो बहुत तुम को भूल जाए

पर चाह कर भी भूल ना पाये

लड़ना झगड़ना

जुदा जुदा एक दूजे से खफा खफा

माने ना सुने ना

रूठा रूठी छोडे ना

एक दूजे बिन रह पावे ना

लुक्का छिपी छोडे ना

हर बातों पे तकरार छोडे ना

साथ एक दूजे का कभी छोडे ना

प्यार से इनकार करे ना

पर लड़ना झगड़ना छोडे ना

Friday, October 30, 2009

प्रेम अनुभूति

क्यो होती है प्रीत क्यो होता है प्यार

जो ना होती प्रीत ना होता प्यार

ना होते श्याम ना होती राधे

इनकी जुगल छबि से ही है प्रेम रस की दुनिया

दिल से दिल को जोड़ना ही है प्रेम की रचना

क्यो प्यार में होता है दर्द क्यो होते है आंसू

दर्द प्यार बडाता है आंसू गम भुलाते है

जो ना होते आंसू तो ना होता दर्द

ना पीती मीरा जहर

ना समझती पाती दुनिया प्रेम अनुराग

क्यो होती प्यार में कसीस क्यो होता है जादू

जो ना होती कसीस ना होता जादू

तो ना होती चाहत

ना होती राधा ना होती मीरा

ना बहती प्रेम की अमृत धारा

जो ना होती प्रीत ना होता प्यार

जो ना होता दर्द ना होते आंसू

जो ना होती कसीस ना होता जादू

तो फिर खुदा क्यो दिल ये बनाता

दिल की धड़कन ही है प्रेम अनुभूति

सारी दुनिया है इस ढाई आखर में ही सिमटी

नसीहत

हम दुश्मनों में भी दोस्त तलासते रहे

अपने हाथो अपना दामन जलाते रहे

एक अजनबी ने कहा

क्यो अपने ऊपर सितम डाहते हो

गैरों के पीछे क्यो अपनी जिंदगानी लुटाते हो

वक्त रहते संभल जाओ

लोट के अपनों के पास आजाओ

शिकार

तरकश के तीर खत्म होने आए

शिकार एक हाथ ना लगा

वन वन भटका

निशाना एक ना लगा

धनुष की टंकार

हाथियों की हुंकार

नगाडो की आवाज़

शिकार एक ना निकाल पाए

आवाज़ को लक्ष्य कर जो तीर चलाया

वो निशाने पे जा लगा

शिकार के सीने को बेंध प्राण हर गया

रंग

रंग डारो रंग डारो

दिल को मेरे रंग डारो

अपने प्यार की कुच्ची से रंग डारो

लगने लगे हर नजारे हसीन

दिखने लगे रंगों की महफ़िल

कुछ इस तरह रंग डारो

पलके खुले तो सप्तरंगी घटा नजर आवे

चहु ओर रंगों की बरसा नजर आवे

कुछ इस तरह रंग डारो

मैं तेरे रंगों में रंग जाऊ

तेरे प्यार के रंगों में खो जाऊ

कुछ इस तरह रंग डारो

कोई ओर ना रंग मोहे अच्छा लागे

तेरे प्यार भरे रंगों के आगे हर रंग फीका लागे

रंग डारो रंग डारो

अपने प्यार की कुच्ची से रंग भर डारो

रंग डारो रंग डारो

मेरे दिल को भी रंग डारो

स्वीकार

ओ दिले जाना पेशे खिदमत है दिले नजराना

तेरी कातिल अदाओ ने है दिल को मारा

तेरी भोली सूरत पे है दिल ये आया

ओ जानेजा ओ जानेजा पेशे अब ओर क्या करू

कैसे हाले दिल ये वयां करू

दिल से हसीन अनमोल कुछ ओर नहीं

मेरा तुम ऐतबार करो

प्यार मेरा स्वीकार करो

ओ जानेजा ओ जानेजा

विश्वास का खून

कत्ल तुने प्यार का कर दिया

दिल हमारा लहुलुहान कर दिया

बीच भंवर में हमको दरकिनार कर दिया

डूबने के लिए हमें लहरों के साथ छोड़ दिया

किनारा भी नसीब ना हो

इसलिए विश्वास का खून कर दिया

Thursday, October 29, 2009

आग

रुसवाई की आग उन्होंने ऐसी लगाई

हमें ख़बर भी ना हो पाई

ओर आशियाना दिल का जल उठा

बेबस पथरीली आँखों से आसमा निहारते रहे

पल भर में ही दिल जलकर राख हो गया

बंजारे

बंजारे हम बंजारे

भटके फिरे गली गली

आज यहाँ कल वहां

सीधे सादे हम बंजारे

प्यार की भाषा हम जाने

चाहो जो हमें अपनाना

तो पहले है कबीले को अपनाना

चाहे जो भी हो जावे

टूटने न दे कबीले की मर्यादा

बंजारे हम बंजारे

राम

भटकता रहा चहु ओर

शान्ति मिली ना किसी ओर

ज्ञान हुवा तब

मात पिता का करो ध्यान

इनके ही श्री चरणों में विराजे चारो धाम

इनकी सेवा से अमन मिले

इनके आर्शीवाद से ही राम मिले

Wednesday, October 28, 2009

अस्मत

लुट गई अस्मत बिक गया शरीर

जिस्म की मंडी में

फिर उत्तर गई एक अबला की तस्वीर

नरक के दलदल में

फंस गई एक ओर मजबूर जिंदगानी

पर कटे परिंदे सी तडपड़ाये

पर सौदागरों के चंगुल से निकल ना पाये

गुजर जिन्दगी ऐसे ही जानी है

किसी के तन तो किसी की दौलत की हवास मिटानी है

इस काल कोठरी के दायरे में ही दुनिया सिमट जानी है

सुंदर नयन

एक तो नयन कमाल

ऊपर से सुरमे का कमाल

काली काली आँखों की अदा हज़ार

कजरारे नयनो की बतिया बेमिसाल

दिल चाहे इन्हे निहारे बार बार

पर ये ना छोडे नखरो का साथ

सुंदर नयनो की दांस्ता बेमिसाल

इन पे मर मिटने के किस्से हज़ार

आगमन

सूर्य उदय हो आया

पूरब में लालिमा निखर आई

पंछियो ने शोर मचाया

जागो भोर हो आई

खिली खिली धुप से

जीवन अंकुरित हो चला

नई सुबह के आगमन को

मन आह्लादित हो चला

चेतना

बिन कुरीतियों का चक्रभ्यु तोड़े

सामाजिक उत्थान कैसे हो

सदियों पुरानी परम्परा को तोड़े बैगर

कैसे समाज सफल हो

करनी होगी पहल

थमानी होगी रोशनी की मशाल

नये समाज गठन के लिए

करना होगा नई चेतना का संचार

असफल

किस्मत दगा दे जाती है

पास आई मंजिल भी छुट जाती है

ना जाने तक़दीर ने क्या खेल रचा है

कामयाबी द्वारे आकर लोट जाती है

रोना भाग्य पे आता है

हर प्रयास असफल हो जाता है

जन्मो का बंधन

कैसा ये अपनापन है

कैसी ये दिल्लगी है

पाने को तुझे दिल ये मचले

कैसी प्यारी ये कशीश है

हर डोर मुझे तेरी ओर खींचे

कैसी ये लगी है

कितना हसीन ये रिश्ता है

कैसी ये चाहत है

जन्म जन्मो का बंधन हो

ऐसा ये नाता है

Tuesday, October 27, 2009

नसीब

काश ऐसा होता

तू तस्वीर से निकल सामने आ जाती

तड़पती रूह को चैन आ जाती

मोहिनी सूरत तेरी

इन्द्र घटा बन जाती

भटकते दिल को राहत मिल जाती

किस्मत कहो या नसीब

तू मुझको मिल जाती

हँसि खुशी

कुछ पल हँसि खुशी के हो

हँसने हँसाने के हो

हँसते हँसते लोट पोट हो जाने के हो

ख़ुद पे हँसने औरो को हँसाने के हो

अपने आप से दिल्लगी लगाने के हो

कुछ पल हँसि खुशी के हो

स्पर्श

जब कभी मन हो उद्दास

तो याद मुझे करना तुम

जब कभी मेरी याद सतावे

चाँद में मेरा अक्स निहारना तुम

जब कभी आए मेरा ख्याल

हवाओ में मेरा स्पर्श अनुभव करना तुम

जब कभी करनी हो दिल की बात

हौले से आवाज़ लगना मुझे तुम

पास मुझे अपने पाना तुम

दिल का दरवाजा

ओ सनम हर जन्म दिल का दरवाज़ा खुला रखना

जब भी याद सताए मेरी दौडी चली आया करना

जब कभी मन हो उद्दास

हमें तुम याद करना

यादो को दिल में छिपाए रखना

लबों पे मेरे गीत सजाये रखना

हर जन्म दिल का दरवाजा खुला रखना

Sunday, October 25, 2009

नजराना

एक ताजमहल मैं भी बनवाऊ

प्यार की इबादत उसमे खुद्वाऊ

मोह्बत की ये निशानी

नजराने में तुझे भेंट करू

महकता रहे अपना प्यार

खिलते रहे प्यार के गुलाब

दुआ रब से ये ही करू

मरके भी जो है साथ निभाना

तेरी कब्र के बगल में मेरी कब्र बनवाऊ

एक ताजमहल में भी बनवाऊ

राधा मोहन

ओ मेरे प्यारे मोहन

ओ मेरे राधा मोहन

प्रीत तुने ऐसी सिखलायी

हर दिलो में प्यार की ज्योत जलाई

सुन के तेरी अनुराग

कर सका ना कोई इनकार

झूम रहे नर और नारी

सुन के तेरी मधुर तान

थाम लिया तुने प्रेम का दामन

राधा रानी के साथ

लुटा दिया प्रेम अनुराग

बाँध लिया प्यार की डोरी से

राधा रानी का हाथ

दिखा दिया जग को

प्रेम ही है सच्ची राह

दे दिया जीने का मूलमंत्र

प्यार में ही बसे जीवन सार

ओ मेरे प्यारे मोहन

ओ मेरे राधा मोहन

गूंज

जब भी आए मेरी याद

दिल से पुकारना मेरा नाम

हर ओर गूंजेगी मेरी ही आवाज़

सुनाई देगा मेरा ही नाम

ये है प्यार का कमाल

सच्चे प्यार की पहचान

दिल से दिल की बात

अब ना कहना मैं नही तुम्हारे साथ

करदो अब प्यार का ऐलान

बतला दो इस जहाँ को

एक दूजे पे मर मिटने को हम है त्यार

लगी

लगी ऐसी लगी

लहू बन नश नश में समा गई

नूर बन आँखों में समा गई

धड़कन बन दिल में समा गई

आँखों से उतर दिल में समा गई

हम में तुम समा गई

Saturday, October 24, 2009

गीत पुराना

गीत पुराना है साज़ नया है

फिर भी तुमको सुनना है

हर जनम तेरे साथ निभाना है

प्यार के मीठे बोलो से

जिन्दगी का सुर सजाना है

इस कशीश को जीने की

सरगम बनाना है

गीत पुराना है साज़ नया है

फिर भी तुमको सुनना है

अमृत धारा

जब धरती मिले अम्बर से

अम्बर बरसे बन के बादल

बादल लेके आए पानी की फुहार

पानी मिले सागर में जाए

सृष्टि के कण कण में

अमृत की धारा बन जाए

प्रतिभा

कलाकार की कल्पना

रचनाकार की रचना

मोहताज नही कद्रदानों की

अनुभूति प्रेरणा बन कृति बन जाए

विचार धाराए नई करवटे लेने लगे

मंथन हो कला साकार हो निखारने लगे

कसर ना कोई रह जाए

कोशीस अगर यही हो तो

प्रतिभा असर हर ओर नजर आए

सच्ची कहानी

ये मेरे यार सुन के दास्ता मेरी

हो ना जाए आँखे नम तेरी

दर्द भरी ये कहानी है

प्रेम की आगोश में लिपटी ये जिंदगानी है

रूठे यार को मनाने की सच्ची ये कहानी है

दास्ता ये अजब प्रेम की गजब कहानी है

मिलने से पहले बिछड़ जाने की कहानी है

तन से रूह जुदा हो जाने की कहानी है

मेरे यार सच्ची ये कहानी है

मुकर्र

हँसते रहो हँसाते रहो

खिलते रहो खिलखिलाते रहो

क्योकि इस पल है जिंदगानी

उस पल का ठिकाना नही

कुदरत ने बुलाने की लिए

कब का वक्त मुकर्र किया

कोई ये जाने नही

Friday, October 23, 2009

सजा

यू लगता है मैं थक गया

जिन्दगी से हार गया

औरो को प्रोत्साहित करनेवाला

आज ख़ुद हतोसाहित हो गया

समझ ना आवे किस राह चलू

जीने की तम्मना करू

या मौत की दुआ करू

भाग्य लिखा टल नही सकता

नियति बदल नही सकती

रब अब तेरा ध्यान करू

सजा यही अपनी पूर्ण करू

जीवन की पहचान

जिसने है मात पिता का स्नेह पाया

उसने है सबसे अनमोल आर्शीवाद पाया

मात पिता के स्नेह आगे

हीरे पन्ने की चमक है फीकी

जिनके आगे स्वयं शीश झुकावे परमदेव

उनसे बड़कर दूजा ना कोई ओर

जिसने है इस राज को जाना

उसने है जीवन को पहचाना

समाज का सृजन

समुद्र मंथन से जैसे हलाहल निकला

आओ वैसे ही हम समाज का मंथन करे

पुरानी कुरीति बेडिया ध्वंस करे

एक नए सुंदर समाज का सृजन करे

भगवान शंकर ने भी विष पान कर

देवतों को अमृत पान प्रदान किया

आओ हम भोले नाथ की राह चले

सामाजिक कुप्रथाओ का नाश करे

आने वाली पीडी के लिए

नए सभ्य समाज का सृजन करे

अनजानी राह

जाम छलकाते रहे रात भर

गमों में डूबे रहे दिन भर

पर दुखो को ना भुला पाये

जितना भुलाना चाहा

उतने घाव हरे होते गए

लगने लगा साकी ने भी नाता तोड़ लिया

जीने की ललक भी अब ओर ना रही

परेशानी में जाम को होटों से लगा लिया

ओर लडखडाते कदमो से अनजानी राह को निकल पड़े

Thursday, October 22, 2009

अजब प्रेम कहानी

तेरे इश्क में मैं देवदास बन ना पाया

तू जो अगर मुमताज बन जाती

मैं ताजमहल बनवा ना पाता

नाकाम इश्क की ये सची दांस्ता

लोगो की जुबा चढ़ ना पाती

अगर अपनी प्रेम कहानी

औरो से जुदा ना कहलाती

जुदाई का गम

दिल मे ये दर्द छुपा रखा है

तेरी जुदाई का गम छुपा रखा है

तेरी यादो को सीने से लगा रखा है

तेरे प्यार में ख़ुद को भुला रखा है

दिल मे ये दर्द छुपा रखा है

तेरी जुदाई का गम छुपा रखा है

बीते लहमो को जीने का सहारा बना रखा है

तेरे इश्क को दवा बना रखा है

दिल मे ये दर्द छुपा रखा है

तेरी जुदाई का गम छुपा रखा है

दिव्य दृष्टि

तेरे आगमन से मन गृह खिल उठा

दिल का आँगन जगमगा उठा

अंधेरे को चीर प्यार की रोशनी लिए

निर्मल पावन कांति मृदुल उज्वल

प्रभा घटा चली आई

दृष्टि प्रेम की दिव्य आभा से झिलमिला उठी

तुम जो आए तो दिवाली चली आई

तन्हा तन्हा

तन्हा तन्हा जिन्दगी कटे नही

काटे वक्त कटे नही

ख़ुद से बेगाना हो फिरू

आस की डोर थामे थमे नही

चित भटके किसी बेगानी चाह को

तलबगार कोई मिले नही

मिलने मिले हजारो

पर हमसफ़र सा कोई नही

तन्हा तन्हा वक्त कटे नही

यकीन

उम्मीद की लो जला रखी है

वक्त आएगा

हमें भी गले लगा जाएगा

मंजिल हमें भी नसीब होगी

हर तम्मना पूरी होगी

रूठी किस्मत बदलेगी

तक़दीर एक दिन हमारी भी चमकेगी

विश्वास अभी है बरक़रार

ख़ुद पे हमें है पूरा यकीन

मिथ्या

मिथ्या कुछ है नही

पर सच भी तो कुछ नही

अलग अलग राग

अलग अलग अनुराग

कही रुंदन भरी शाम तो

कही मुस्कराहट लिए प्रभात

गुजर जाती है जिंदगानी

रह जाती है बात

समझ आती नही ये बात

कुदरत की पहेली का

हल नही किसीके पास

कुछ कुछ मिथ्या

कुछ कुछ सत्या

यही है जीवन सार

साज नया

गीत नया गायेंगे

साज नया बनायगे

संगीत बन लबों पे चले आयेंगे

काजल बन आँखों में बस जायेंगे

मेहदी बन हाथो में रच जायेंगे

तू कर ले लाख इनकार

फिर भी तुझ को उठा ले जायेंगे

पुष्पांजलि

कहने को नही आप हमारे साथ

पर दिलो में बसता है आप का प्यार

पंचतत्वों से बने शरीर

पर आप के हम पंच प्यारे

मिलके बने आप के जीवन गीत

साज बिना संगीत अधुरा

बिन पिता जीवन अधुरा

फिर भी है एक आस

पुनः मिलेगा आप का साथ

पुष्पांजलि अर्पण कर रहे

आप के श्री चरणों में हम बच्चे नादान

करलो आप स्वीकार

धरदो हम बच्चो के सर पर

अपना प्यार भरा हाथ

शिक्षा

अन्धकार में एक दीपक जलाया

प्रकाश से तम को दूर भगाया

विचार ऐ मन में आया

बदलाव की हवा साथ लाया

क्यो ना बदल जाए जग सारा

कोई ना रह पाए अनपड़ गवारा

शिक्षा ज्योति जलती रहे

खुशियाँ हर घर बरसती रहे

आओ एक एक दीपक हम तुम भी जलाये

अज्ञान पर ज्ञान की विजय पताका फहराए

प्यार हमें

दिल ने कहा हमने कोरे कागज पे लिखा

कुछ होने लगा दिल आप के ख्यालो में खोने लगा

प्यार हमें होने लगा दिल आप का होने लगा

Tuesday, October 20, 2009

मौत

सत्य ही तो है

मौत अटल सत्य है

यादे रह जाती है उनकी सिर्फ़

कर्म जिनके हो अच्छे

रह जाते है कदमो के निशा

प्रेरणा बन नई रह दिखलाने को

इसीलिए छोड़ मोह माया का पाश

धरो ईश्वर का ध्यान

हो जायेगी बेतरनी पार

पहुँच जावोगे वेकुन्ट धाम

Saturday, October 17, 2009

अजनबी

जब से तुने है छुआ

मेरे दिल के तारो को

खोया खोया सा रहता हु

ख़ुद से अंजना सा रहता हु

ओ अजनबी ओ अजनबी

कैसा जादू है तुने किया

मैं ख़ुद से बेगाना रहता हु

खोया खोया सा रहता हु

तेरी यादो में तेरी पनाहों में

भुला दिया भुला दिया

ख़ुद को तेरी चाहत में

ओ अजनबी ओ अजनबी

जब से तुने है छुआ

प्यार मुझको है हो गया

ओ अजनबी ओ अजनबी

इतिहास

किस्मत ऐसी हमारी कहाँ

कोई हमें भी याद रखे

भुला आपने ऐसे दिया

जैसे इतिहास में यादो

को दफना दिया

दिल्लगी

गैरों में अपनों को तलाशा

इसलिए दोस्त कह तुम्हे पुकारा

जो बुरा लगा हो तो बात ना करना

ये तो सिर्फ़ दिल्लगी थी

दिल दुखाने की तमना ना थी

रुसवाई

जहर तुने जो पिलाया

अमृत समझ पी लिया

अब तमना जीने की ओर ना रही

कत्ल वफा का तू ने जो कर दिया

रुसवाई के सिवा कुछ ओर ना दिया

हमें ही बेवफा बना छोड़ दिया

तक़दीर

खुश किस्मत होते है वो

बिन मांगे जिन्हें मिले प्यार की सोगात

चंदा सूरज चले इनके साथ

नभ भी झुक कर इन्हे करे प्रणाम

तक़दीर इनकी इतलाये देख ग्रह नक्षत्रो की चाल

जीवन इनका गुजरे प्यार भरी ठंडी छाव

मरके भी ये रोशन करे जहाँ

बन के सितारा झिलमिल करे उनके साथ

है ये किस्मत की बात

उदास ना होवो मेरे यार

क्या पता तुम ही हो वो खुशनसीब इंसान

खुशनसीब है हम

चाचा खुशनसीब है हम

जो आप को पिता रूप में पाया

पुण्ये है कोई किया

जो आप के अंगने जनम लिए

गुरुर है अपनी किस्मत पे

आप का अंश कहलाये

स्वाभिमानी आप ने बनाया

स्वालंबी होना हमें सिखलाया

कर्तव्य बोध हमको कराया

प्यार का सबक हमको पढाया

जीवन जीना आप ने सिखलाया

निर्वाण का महत्व हमको समझाया

अब बस दुआ है इतनी सी

आगे भी आप हमारा आप रखो ध्यान

हर जनम बना रहे अपना साथ

Thursday, October 15, 2009

दीपावली

दीपावली की इस शुभ बेला रब से दुआ है हमारी

पर्व ये आप के लिए मंगलमय हो

जीवन सदा सुखमय हो

धन धान्य से भरे भंडार हो

दीपावली की तरह रोशन आप का भी जहाँ हो

Wednesday, October 14, 2009

एक चिठ्ठी पिता के नाम

ओ चाचा थे आओ ना

था बिन घर सुनो सुनो लाग है

बिन थार दिवाली फीकी नजर आव है

चाचा थे सुन लो आज माहरी मनुहार

थारा टाबर जोह थारी बाट

अब ना करो थे निराश

सगळा थान कर बहुत याद

माँ खड़ी द्वारे कर रही थारो इन्तजार

हर बाताम थारो ही नाम

था बिन नही म्हारा जीवन को सार

अब तो ना रूठो थे आज

जिद माहरी भी है आज

आनो पडसी थान इस दिवाली माहरा पास

मान्नो पडसी या छोटी सी बात

आ कर निभानो पडसी वादों जो कियो आप

इस दिवाली आनो पडसी

चाचा सुन माहरी मनुहार

Tuesday, October 13, 2009

चिठ्ठी रब के नाम

ऐ मेरे रबा मेरी फरियाद सुन लेना

इस दिवाली मेरे पिता को भेज देना

हमारे दिलो के बुझे दीयो को रोशन कर देना

पल दो पल का ही सही माँ को उनका साथ मिले

हम बच्चो को उनका आर्शीवाद मिले

ऐ प्रार्थना स्वीकार कर लेना

पाती ऐ आस भरी

पिता को पढ़ सुना देना

उनकी यादो के दीपक सजाये है

उनके आगमन को तोरण द्वार सजाये है

ऐ उनको बतला देना

ऐ मेरे रबा मेरी फरियाद सुन लेना

इस दिवाली मेरे पिता को भेज देना

दिवाली

आओ इस दिवाली एक नए युग का सूत्रपात करे

दिल से दिल मिलाते चले

प्यार की लड़ी जोड़ते चले

माला खुशिया भरे दीपो की पिरोते चले

हर आगाज में प्यार का संदेश बरसाते चले

आओ इस दिवाली एक नए युग का सूत्रपात करे

Monday, October 12, 2009

एक नई परम्परा

रोशनी के इस पावन पर्व पर

आओ एक नई परम्परा की शुरुआत करे

हर घर खुशियों से रोशन हो

एसे सुनहरे भविष्य की रचना करे

अंधरे में भी सितारा बन चमके

एसे नीव की आधारशिला रखे

रोशनी के इस पावन पर्व पर

आओ एक नई परम्परा की शुरुआत करे

रोशन जहाँ एसा हो सूरज भी शरमा जाए

दिवाली की उज्जवल किरणों के आगे

सूरज की रोशनी भी फीकी नजर आवे

रोशनी के इस पावन पर्व पर

आओ एक नई परम्परा की शुरुआत करे

चाचा दीपावली बिन आप के

चाचा दीपावली बिन आप के ना रोशन होगी

ना कोई खुशिया होगी

ना कोई उमंग होगी

हमारे दिलो मेंआप के यादो

के दीयोकी रोशनी होगी

आप के आर्शीवाद से जीवन रोशन रहे सदा

आप हमारे प्रेरणा स्त्रोत रहे सदा

इस दिवाली बस यही कामना होगी

अनुभूति

दिल ऐ कह रहा है

मन ऐ तड़प रहा है

तेरे आलिंगन में कोन सा जादू है

तेरी अनुभूति का अहसास तेरे

जाने के बाद भी हो रहा है

तेरे बिना ये दिल अब चहक नही रहा है

मन महक नही रहा है

ये मेरे दिल को क्या हो रहा है

तेरी यादो में डूबा जा रहा है

जिया जाए ना

तुम से मिलने जी तरसे

यू लगे सदिया बीती

प्रियतम तुम को जी भर देखे

कंचन सी तेरी काया

फूलो सी तेरी मुस्कान

दिल को देवे सुकून हजार

दिल कहे हर जनम

तेरी आगोस में लिपटा रहू

तेरे प्यार भरे आँचल में सिमटा रहू

दूरी अब सही ना जाए

तुम बिन अब जिया ना जाए

सिंदूर

कैसा वो पल होगा

मेरे हाथो में तेरा तेरा हाथ होगा

हर कदम साथ साथ होगा

लबों पे सिर्फ़ एक दूजे का नाम होगा

मेरे नाम का सिंदूर तेरी मांग में होगा

नफासत

ये दुनिया एक हसीन सपना है

जी भर जीना चाहिए

खाब टूटे इससे पहले

तम्मना पुरी कर लेनी चाहिए

खाब में सचाई का अक्स नजर आना चाहिए

तभी तो कहते है

नफासत के साथ जीना चाहिए

जीने का बहाना

तेरी बाहों का जो सहारा मिला

जीवन को किनारा मिला

तेरी जुल्फों की घटा में ख़ुद को भुला दिया

झील सी सुनहरी आँखों में ख़ुद को डूबा दिया

तेरी आगोस में समां दुनिया को भुला दिया

तेरे प्यार में ख़ुद को पा लिया

तेरा जो सहारा मिला

जीने का बहाना मिला

कुदरत का लिखा

कुदरत ने रचा खेल निराला

विश्वास की डोर हो गई कमजोर

जीवन पतंग हो गई बे डोर

उम्मीदों के आसमा को

छूने से पहले कट गई डोर

फटी पतंग देख रोना आया

दिल को बहुत समझाया

अपनी फटी किस्मत पे यकीन ना आया

कुदरत का लिखा मिट ना पाया

आंसुओ के दरिया में हमको बहा ले गया

क्यो आए

क्यो आए तुम चले जाने को

मझे रुला जाने को

गम ऐ ना था तुम क्यो मिले

अफ़सोस इस बात का था

क्यो जिन्दगी के इस मुकाम पे मिले

समझ आए नही रोऊ या हसू

हाथ तुम भी थामे रख नही सकती

अपने अरमानो का गला घोट नही सकती

छोड़ इसलिए मुझको तुम चल दी

सौदागर

ओ सपनो के सौदागर , सौदागर

सपने जो तुने दिखलाये उनको है जीना

सपनो की दुनिया में ही हो अपना बसेरा

सुंदर सपने के आगे दिल कुछ ओर ना चाहे

सपने जो मिलके देखे

खाब इतना सा है वो सच हो जाए

इस जनम ऐ हसीन सपना टूट ना पाए

मुझको भी ले चल अपने सपनो की दुनिया में

ओ सौदागर सपनो के सौदागर

रंग

तेरी जुस्तजू ऐसी लगी

तेरे रंग में रंग गया

लगन ऐसी लगी

मैं तेरा दीवाना हो गया

तू दिल है मैं धड़कन

बिन एक दूजे कुछ नही

हर साँसों में तेरा ही नाम है

बिन तेरे जीना दुस्वार है

ऐ प्यारा सा खाब है

एक मीठी सी खुमार है

सृजन

एक नई धारा का सृजन हो रहा है

प्राचीन और नव युग का अद्भुत संगम हो रहा है

आधुनिकता के इस युग में

नई कलात्मक कृतियों का उदय हो रहा है

एक नए संसार का शुत्रधार हो रहा है

नए भविष्य की कल्पना का सपना साकार हो रहा है

एक नई धारा का सृजन हो रहा है

जिया

तुने दिल पे दस्तक जो दी

जिया तेरे बिना अब लागे नही

एक एक लहमा लगने लगा एक सदी समान

जिस्मो जा में तेरी ही खुशबू महकी

हर साँसों में तेरी ही जुस्तजू फेली

जूनून तेरा ही जूनून

तेरी चाहत का जूनून

साँझ सबेरे

साँझ सबेरे मिलने आना

बहाना ना कोई बनाना

मिलके बुनेगे एक नया सपना

प्यारा सा हो घर एक अपना

प्यार से रोशन रहे आँगन अपना

खुशियों से महकी रहे अपनी बगिया

जो सच करना हो सपना

हाथ पकड़ना तुम ना भूलना

साँझ सबेरे मिलने आना
बहाना ना कोई बनाना

जुदा

मैं ख़ुद में खोया रहा

चाहा बहुत खालीपन तोड़ डालु

मुश्किल घड़ी पर खतम ना होती

अकेले रह गया

साथ सब का छुट गया

जाने विधाता ने किस्मत में क्या लिखा

क्यो सब को मुझ से जुदा कर दिया

संग सब का होते हुवे भी

तन्हा मुझ को बना दिया

लगने लगा खुदा को मेरे से ज्यादा लगाव है

इसलिए किसी ओर का नाता मुझ से जुड़ने ना दिया

फुरसत

सोचा फुरसत निकालू कुछ पल

जिन्दगी संग बिताऊ कुछ पल

करीब से पहचानू , अपने को तलाशु

वक्त ना मिला , जिन्दगी से कहा

एक रोज मेरे पास भी आना

लेखा जोका साथ लाना

अभी के लिए माफ़ करना

पूरण अभी काम बाकी

अभी नही आई फुरसत की बारी

जिन्दगी मेरा सलाम स्वीकार करना

उड़ चलू

मन ये कहे उड़ चलू उड़ चलू

गगन गगन फिरता चलू

चहक चहक नीले अम्बर को छूता चलू

आजाद परिंदे सा डाली डाली छूता चलू

उड़ चलू उड़ चलू

खुशियों के पर लगा उड़ता चलू

कभी पर्वतो को कभी नदियों को छूता चलू

सुन के दिल की पुकार

हो के अरमानो के उड़न खटोले में सवार

उड़ चलू उड़ चलू

सुन के मन की बात दिल कहे ये बार बार

उड़ चलू उड़ चलू , उड़ चलू उड़ चलू

Saturday, October 10, 2009

गागर में सागर

गागर में सागर समां गयो रे

टुमक टुमक चाल पे दिल आ गयो रे

बन के मनमीत दिल में समां गयो रे

बदरी में चाँद छिपा गयो रे

घूँघट में मुख्डो नजर आ गयो रे

देख के आँखों में नूर आ गयो रे

दिल में दिल समां गयो रे

नस नस में प्यार भरा गयो रे

गागर में सागर समां गयो रे

अंगारे

जलते अंगारों पे लेट गयी

पिया तेरी खातिर ज़माने के सितम सह गयी

फिर तेरी जिंदगानी में लोट ना पायी

तुने यारी अच्छी निभाई

एक बार भी हमको आवाज़ ना दी

तेरी रुसवाई पे आंसू बहाते रहे

पर बेवफा तुने पलट के भी ना देखा

ज़माने की ठोकर खाने हमें छोड़ दिया

तड़पने के लिए अकेला छोड़ दिया

Tuesday, October 6, 2009

धूम धड़का

धूम धड़का होने दो

खेल अजब गजब चलने दो

मारो ताली पीटो ढोल

प्यार की बारिस होने दो

खिले फूल छुटे फुल्झडिया

मुस्कान रोनक भरी आने दो

बज रही शहनाई

दुल्हन को घर आने दो

चक्रभ्यु

जिन्दगी के चक्रभ्यु में ऐसे फंसे

ख़ुद से ख़ुद को रूबरू ना करा पाए

वक्त पंख लगा उड़ता चला गया

यादो को समेट भी ना पाए

जिस जिन्दगी की तलाश में भटके

उसे अपने में तलाश भी ना पाए

जिन्दगी के असली दर्पण को समझ ना पाए

अपने ही अक्स को पहचान ना पाए

इस चक्रभ्यु को समझ ना पाए

जी के भी जी ना पाए